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August 24, 2026 5:02 am

मदरसा अरबिया कुरानिया इटावा में स्वतंत्रता दिवस का भव्य समारोह स्वतंत्रता संग्राम में उलेमा और मदरसों की भूमिका तथा वर्तमान दौर में मदरसों की जिम्मेदारियों पर चर्चा

इटावा, 15 अगस्त 2026: मदरसा अरबिया कुरानिया, कटरा शाहब खाँ, इटावा में देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एक गरिमापूर्ण एवं भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इसमें छात्रों, शिक्षकों और मदरसा के पदाधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। समारोह का शुभारंभ मदरसा के प्रधानाचार्य मौलाना तारिक शम्सी द्वारा ध्वजारोहण के साथ हुआ। ध्वजारोहण के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी गई तथा देश की सुरक्षा, प्रगति, समृद्धि, शांति और राष्ट्रीय एकता के लिए दुआ की गई।

समारोह को संबोधित करते हुए मौलाना तारिक शम्सी ने कहा कि स्वतंत्रता केवल एक राजनीतिक परिवर्तन का नाम नहीं है, बल्कि यह उन अनगिनत कुर्बानियों का परिणाम है, जो हमारे पूर्वजों ने देश की आजादी के लिए दीं। उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में उलेमा-ए-किराम, धार्मिक मदरसों और खानकाहों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और अविस्मरणीय रही है। उलेमा ने न केवल अंग्रेजी साम्राज्यवाद के खिलाफ जनता में जागरूकता पैदा की, बल्कि अपने प्राण, धन और सुख-सुविधाओं का त्याग करके स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।

 

उन्होंने कहा कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में उलेमा-ए-किराम ने नेतृत्वकारी भूमिका निभाई। शाह वलीउल्लाह मुहद्दिस देहलवी, शाह अब्दुल अजीज मुहद्दिस देहलवी, हाजी इमदादुल्लाह मुहाजिर मक्की, मौलाना मुहम्मद कासिम नानौतवी, मौलाना रशीद अहमद गंगोही, मौलाना फजल-ए-हक खैराबादी, शैखुल हिंद मौलाना महमूद हसन देवबंदी, मौलाना अहमदुल्लाह शाह मद्रासी, शैखुल इस्लाम मौलाना हुसैन अहमद मदनी, मौलाना हसरत मोहानी, मौलाना मुहम्मद अली जौहर, मौलाना अबुल कलाम आजाद, मौलाना मुहम्मद अली मुंगेरी, मौलाना हिफ्जुर्रहमान सियुहारवी सहित अनगिनत उलेमा ने आजादी की भावना को जन-जन तक पहुंचाया और अत्याचार एवं दमन के खिलाफ आवाज बुलंद की। बाद के दौर में भी धार्मिक मदरसों ने स्वतंत्रता आंदोलन को वैचारिक, नैतिक और व्यावहारिक शक्ति प्रदान की। मदरसों के छात्रों और उलेमा ने जेल की यातनाएं सहन कीं और हजारों उलेमा ने देश की आजादी के लिए अपने घर-बार और अपने प्राण तक कुर्बान कर दिए।

 

उपप्रधानाचार्य मौलाना मुहम्मद सैयद मुहम्मद साद कासमी ने अपने संबोधन में कहा कि इस्लामी मदरसों ने भारतीय उपमहाद्वीप में केवल धार्मिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार का कार्य नहीं किया, बल्कि देश की स्वतंत्रता, राष्ट्रीय जागरूकता, सामाजिक सुधार और नैतिक प्रशिक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों की जानकारी नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है, ताकि युवा अपने देश के इतिहास, पूर्वजों के संघर्ष और स्वतंत्रता के वास्तविक महत्व से परिचित हो सकें।

 

उन्होंने कहा कि आज भी मदरसे देश में शांति, एकता और सद्भावना का संदेश फैलाने का कार्य कर रहे हैं। ये मदरसे ही हैं, जो निःशुल्क शिक्षा प्रदान करके समाज को सम्मानित और जिम्मेदार नागरिक उपलब्ध करा रहे हैं। हमें इन मदरसों और मदरसों से जुड़े सेवाभावी लोगों के योगदान का सम्मान करना चाहिए।

 

नाज़िम-ए-तालीमात डॉ. मुफ्ती मेराज अहमद ने कहा कि वर्तमान दौर में मदरसों की जिम्मेदारियां और भी बढ़ गई हैं। आज मदरसों को धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ छात्रों में देशप्रेम, राष्ट्रीय एकता, अच्छे चरित्र, अनुशासन, जनसेवा तथा संवैधानिक एवं नागरिक जिम्मेदारियों की भावना भी पैदा करनी होगी। उन्होंने कहा कि मदरसे शांति, प्रेम, भाईचारे और सद्भावना का संदेश फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस संदेश को व्यापक रूप से जन-जन तक पहुंचाने तथा समाज में मदरसों के प्रति फैलाए जा रहे नकारात्मक प्रचार को समाप्त करने की आवश्यकता है। मदरसों से जुड़े लोगों को अपने सकारात्मक संदेश के माध्यम से इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए आगे आना चाहिए।

 

अन्य शिक्षकगण ने भी अपने संबोधनों में स्वतंत्रता के महत्व, स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों तथा देश के निर्माण और विकास में नई पीढ़ी की भूमिका पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि भारत विभिन्न धर्मों, भाषाओं, सभ्यताओं और संस्कृतियों का एक खूबसूरत गुलदस्ता है। इसकी मजबूती इसी में है कि सभी नागरिक आपसी सम्मान, सहिष्णुता और राष्ट्रीय एकता की भावना के साथ देश की प्रगति में अपना योगदान दें।

 

वक्ताओं ने वर्तमान परिस्थितियों के संदर्भ में मदरसों की भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा कि मदरसों को समाज में शांति, संतुलन, भाईचारे, शिक्षा, नैतिकता और जनसेवा के केंद्र के रूप में अपनी भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाना चाहिए। मदरसों के छात्र देश के जिम्मेदार नागरिक हैं। उन्हें अपनी धार्मिक पहचान के साथ-साथ देश की प्रगति, शिक्षा, सामाजिक सेवा और राष्ट्रीय एकता के लिए भी सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।

 

इससे पूर्व छात्रों ने भी उर्दू, हिंदी, अंग्रेजी, अरबी और फारसी भाषाओं में स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और देश की आजादी के लिए उनके द्वारा दी गई कुर्बानियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

 

समारोह में इस संकल्प को दोहराया गया कि मदरसा अरबिया कुरानिया अपने शैक्षिक एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों में धार्मिक चेतना के साथ देशप्रेम, नैतिक मूल्यों, मानव सेवा तथा देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना पैदा करने का कार्य निरंतर जारी रखेगा।

 

अंत में देश की स्वतंत्रता की रक्षा, राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता, शांति-व्यवस्था, समृद्धि और विकास के लिए विशेष दुआ की गई।

 

इस अवसर पर छात्रों और शिक्षकों ने संकल्प लिया कि वे अपने पूर्वजों और स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों को याद रखते हुए देश के निर्माण एवं विकास तथा समाज में शांति, सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा के साथ निभाएंगे।

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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