इटावा, 23 अगस्त 2026 – प्रकृति प्रेमियों के लिए एक यादगार अवसर रहा, जब इटावा सफारी पार्क एवं सोसाइटी फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (स्कॉन) के संयुक्त तत्वावधान में द्वितीय वर्ष की प्रथम नेचर वॉक का शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम की शोभा मुख्य अतिथि पार्क निदेशक डॉ. अनिल पटेल ने बढ़ाई, जिन्होंने हरी झंडी दिखाकर इस अनोखी पारिस्थितिकी यात्रा को रवाना किया।
350 हेक्टेयर में बसा वन्यजीवों का स्वर्ग
डॉ. पटेल ने बताया कि इटावा सफारी पार्क करीब 350 हेक्टेयर में फैला एक विशिष्ट संरक्षण क्षेत्र है। यहाँ संरक्षित श्रेणी के पाँच वन्य जीवों की सफारी के साथ ही एशियाई शेरों का विशेष प्रजनन केंद्र भी स्थापित है। उन्होंने कहा, “यह केवल सफारी पार्क नहीं, बल्कि प्राकृतिक वनस्पतियों, कीट-पतंगों और स्थानीय वन्यजीवों के संरक्षण का जीवंत मॉडल है।”
शेरों और तेंदुओं के व्यवहार को करीब से जाना
इस नेचर वॉक ने प्रतिभागियों को न सिर्फ घने वन क्षेत्र का भ्रमण कराया, बल्कि एशियाई शेरों और तेंदुओं को उनके प्राकृतिक आवास में निकटता से देखने और उनके व्यवहार, भोजन शैली एवं रहन-सहन के बारे में विशेषज्ञों से जानकारी लेने का सुनहरा अवसर भी दिया।
विशेषज्ञों की टीम ने किया मार्गदर्शन
वॉक के दौरान बायोलॉजिस्ट बी.एन. सिंह, डॉ. मुकेश चौधरी, डॉ. अत्री गुप्ता, डॉ. कमल कुमार और स्कॉन के महासचिव डॉ. राजीव चौहान ने विशेषज्ञ की भूमिका निभाते हुए प्रकृति के विभिन्न आयामों को समझाया।
इस वॉक में नियमित भागीदार मनीष सहाय ने बताया कि आज की इस पारिस्थितिकी यात्रा के दौरान प्रतिभागियों ने –
153 पेड़-पौधों की प्रजातियाँ,23 पक्षियों की प्रजातियाँ,21 तितलियों की प्रजातियाँ
अवलोकित कीं, जो इस क्षेत्र की जैव-विविधता का सजीव प्रमाण है।
गणमान्यों और बच्चों की उत्साहपूर्ण सहभागिता
इस वॉक में चिकित्सकों, शिक्षकों, व्यवसायियों, छात्र-छात्राओं और विशेष रूप से बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सभी ने प्रकृति के करीब जाने और संरक्षण के प्रति जागरूकता का संकल्प दोहराया।
सफलता में सभी का योगदान
इस आयोजन को सफल बनाने में सफारी के वन क्षेत्राधिकारी रूपेश श्रीवास्तव एवं अन्य कर्मचारियों के साथ ही स्कॉन के सक्रिय सदस्यों – अर्जुन, मुकेश, अरुण, जाह्नवी, वैष्णवी एवं समस्त नेचर लवर्स का अभूतपूर्व सहयोग रहा।
नेचर वॉक – पहल संरक्षण की, कदम उज्ज्वल भविष्य की ओर
यह नेचर वॉक न केवल एक भ्रमण मात्र थी, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का एहसास कराने वाली एक अनोखी पहल साबित हुई।
Author: Mohammed irfan













