
शक्कर के चक्कर में घिरी भाजपा सरकार महंगाई से त्रस्त आम आदमी, चीनी-तेल-गैस के बढ़ते दामों ने बिगाड़ा घर का बजट
महंगाई के मोर्चे पर आम आदमी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। कभी करीब 40 रुपये किलो मिलने वाली चीनी अब कई जगह 65 से 70 रुपये किलो तक पहुंचने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसका असर आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई दे रहा है। चाय की प्याली, जो कभी 5 रुपये में मिल जाती थी, अब कई स्थानों पर 10 रुपये तक पहुंच गई है।चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर गन्ने के बढ़ते इस्तेमाल और एथेनॉल उत्पादन को भी एक वजह माना जा रहा है। तर्क है कि गन्ने का बड़ा हिस्सा एथेनॉल उत्पादन की ओर जाने से चीनी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, कीमतों में वास्तविक वृद्धि के कारणों को लेकर सरकार को स्पष्ट स्थिति जनता के सामने रखनी चाहिए, ताकि भ्रम की स्थिति दूर हो सके।महंगाई की मार केवल चीनी तक सीमित नहीं है। रसोई गैस, खाद्य तेल और रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं पर बढ़ता खर्च मध्यमवर्गीय परिवारों के घरेलू बजट को लगातार प्रभावित कर रहा है। आय सीमित है, लेकिन खर्च बढ़ता जा रहा है। ऐसे में
Author: Mohammed irfan













