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August 24, 2026 11:32 am

मिशन सेफ फ्यूचर’ आज से: स्कूल बसों की फिटनेस परीक्षा शुरू, कितनी पास और कितनी फेल? अभिभावकों की चिंता बढ़ी

उत्तरप्रदेश: इटावा 1 जुलाई से प्रदेशभर में स्कूली बसों की सघन जांच का अभियान ‘मिशन सेफ फ्यूचर’ शुरू हो गया है। परिवहन विभाग 31 जुलाई तक चलने वाले इस अभियान में बसों की फिटनेस, तकनीकी खराबी और सुरक्षा मानकों की गहन जांच करेगा। लेकिन सवाल यह है कि आज से पहले जो स्कूल ‘सोए’ हुए थे, क्या संबंधित विभाग उन्हें जगा पाएगा? और जो स्कूल अभिभावकों से फीस के रूप में मोटी रकम लेते हैं, क्या वे अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर पहले से सजग थे, या वे सिर्फ सरकारी निर्देश का इंतज़ार कर रहे थे?

 

कितनी बसें पास, कितनी फेल? आंकड़े बताएंगे

 

प्रदेश के इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मैनेजमेंट पोर्टल पर करीब 65,162 स्कूल वाहन पंजीकृत हैं। इनमें से 56,471 के पास फिटनेस सर्टिफिकेट और 7,418 के पास परमिट हैं। यानी हजारों वाहन ऐसे हैं जिनके दस्तावेज़ अधूरे हैं या समाप्त हो चुके हैं। सोनभद्र जिले के हालात और भी चिंताजनक हैं, जहां 427 पंजीकृत स्कूल वाहनों में से 23 की फिटनेस और 41 के परमिट की अवधि समाप्त हो चुकी है। प्रयागराज में हाल ही में हुई जांच में 251 वाहन फिटनेस टेस्ट में फेल हुए और 188 के पंजीकरण निलंबित कर दिए गए। अब देखना होगा कि इस बार कितनी बसें पास होती हैं और कितनों को फेल कर सीज किया जाता है।

 

क्या होगा जांच में?

 

जांच के दौरान बस की बॉडी की मजबूती, छत की भार वहन क्षमता, सीट एंकरेज, आपातकालीन दरवाज़े, अग्निशामक यंत्र (02 किलो का ड्राई पाउडर), स्पीड गवर्नर (अधिकतम 40 किमी/घंटा), ब्रेक, टायर, लाइटिंग और दस्तावेज़ (आरसी, परमिट, बीमा, पीयूसी, फिटनेस) की जांच होगी। साथ ही बस का रंग गोल्डन येलो होना और उस पर स्पष्ट रूप से ‘स्कूल बस’ लिखा होना अनिवार्य है।

 

स्कूलों पर सवाल: क्या सुरक्षा सिर्फ निर्देश पर?

 

अभियान का पहला चरण (1-7 जुलाई) स्कूल प्रबंधकों को नोटिस और चेतावनी देने का है। दूसरे चरण (8-15 जुलाई) में परिवहन, पुलिस, यातायात और शिक्षा विभाग की संयुक्त टीमें सख्त कार्रवाई करेंगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या स्कूलों को सरकारी निर्देश का इंतज़ार करना चाहिए था? क्या बच्चों की जान से खिलवाड़ करने वाले स्कूलों पर सिर्फ जुर्माना ही काफी है, या उनकी मान्यता रद्द की जानी चाहिए? हाल ही में अलीगढ़ और आगरा में पुरानी और खराब बसों से हुए हादसों ने एक बार फिर साबित किया कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी जानलेवा साबित हो सकती है। अब देखना होगा कि क्या यह अभियान स्कूलों को ‘जगा’ पाता है या फिर यह सालाना रस्म अदायगी भर रह जाता है।

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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