इटावा / कानपुर – शिक्षा के नाम पर हुई इस करोड़ों की ‘कागज़ी लूट’ ने पूरे विभाग को शर्मसार कर दिया है। साल 2008-09 का बहुचर्चित 15 करोड़ रुपये का छात्रवृत्ति घोटाला अब EOW (आर्थिक अपराध शाखा) की जांच में ऐसे खुला कि सरकारी तंत्र के तार-तार बिखर गए। असल जिंदगी में जिन बच्चों का कोई अस्तित्व नहीं था, वही कागजों पर छात्रवृत्ति के हकदार बन गए!
EOW का बड़ा एक्शन: दो FIR, 154 आरोपी, तलवार लटकी
कानपुर यूनिट की EOW ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज कीं:
एफआईआर घोटाले की राशि नामजद आरोपी
पहली ₹14 करोड़ 3 लाख 28 हजार 474 102 लोग
दूसरी ₹57 लाख 76 हजार 400 52 लोग
EOW ने पहला शिकंजा कसते हुए मुख्य आरोपी लाल सिंह (प्रबंधक) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। अब बाकी 153 आरोपियों पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है – जल्द ही और नाम सामने आ सकते हैं।
कैसे चला यह ‘अस्तित्वहीन’ खेल?
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि जिन स्कूलों में छात्रवृत्ति भेजी गई, उनमें से बहुत से स्कूल कागजों में तो मान्यता प्राप्त थे, लेकिन धरती पर उनका कोई वजूद नहीं था!
· फर्जी स्कूलों में SC/ST/OBC/अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चों की फर्जी संख्या दिखाई गई।
· शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बिना भौतिक सत्यापन के फाइलें पास कर दीं।
· समाज कल्याण विभाग ने आंखें मूंदकर करोड़ों सीधे खातों में उड़ेल दिए।
यानी बिना विद्यार्थी, बिना स्कूल के ही सरकारी खजाना खाली कर दिया गया!
इन 65 स्कूलों पर लगा है गंभीर आरोप
घोटाले की जद में आए 65 संस्थानों में ये नाम शामिल हैं (सूची का सिर्फ एक हिस्सा):
हजरत मोहम्मद साहब मेमोरियल, शिव शक्ति सरस्वती ज्ञान मंदिर, अनस मेमोरियल, बौद्ध भारती पब्लिक स्कूल, बीआरएस मेमोरियल कान्वेंट, महर्षि विवेकानंद मंदिर, दयानंद एंग्लो वैदिक, टैगोर एजुकेशनल और पंचशील शिक्षा निकेतन।
अफसरों ने दिया बड़ा बयान
जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) अतुल कुमार सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि EOW को स्कूलों, प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों की पूरी लिस्ट दे दी गई है। हालांकि, सवाल यह भी उठ रहा है – जब स्कूल ही नहीं थे, तो मान्यता किस आधार पर दी गई?
अब EOW पूरी चेन को तोड़ने में जुटी है – रिकवरी की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी, और हर एक आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।











