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February 15, 2026 5:16 am

मायावती का फोन उठाएंगे अखिलेश यादव,कांग्रेस के रुख से मिल रहे हैं संकेत

लखनऊ।उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी बिसात बिछना शुरू हो गई है।बहुजन समाज पार्टी ने भी साफ कर दिया है कि वो ये चुनाव अकेले ही लड़ेगी,लेकिन बसपा ने एक ऐसा संकेत भी दिया है,जिससे इंडिया गठबंधन की उम्मीदें बढ़ गई है।कयास है कि अगर बसपा की एक शर्त पूरी होती है तो वो विपक्षी दलों के साथ आ सकती है।

 

विधानसभा चुनाव से पहले मायावती पर टिकी सबकी निगाहें

 

विधानसभा चुनाव से पहले बसपा मुखिया मायावती पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।कांग्रेस पहले ही बसपा को इंडिया गठबंधन में शामिल होने का खुला न्योता दे चुकी हैं तो वहीं समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव का रुख भी नरम बना हुआ है,इससे संकेत मिल रहे हैं कि भाजपा के खिलाफ विरोधी दल मायावती के साथ मिलकर सामाजिक और जातीय गोलबंदी करना चाहते हैं।

 

अगर मायावती इंडिया गठबंधन में आती हैं तो क्या अखिलेश मायावती और बसपा नेताओं का उठाएंगे फोन

 

अगर मायावती इंडिया गठबंधन में आती हैं तो क्या फिर सपा मुखिया अखिलेश यादव मायावती या बसपा नेताओं का फोन उठाएंगे,क्योंकि मायावती ने साल 2019 लोकसभा चुनाव के बाद सपा से गठबंधन टूटने पर खुलासा करते हुए कहा था कि चुनाव के बाद अखिलेश यादव ने बसपा नेताओं का फोन तक उठाना बंद कर दिया था,इसकी वजह से उन्होंने पार्टी के सम्मान के लिए सपा से गठबंधन तोड़ा था।

 

इंडिया गठबंधन के साथ आएंगी मायावती

 

बसपा मुखिया मायावती भले ही बार-बार यूपी में अकेले चुनाव लड़ने की बात कह रही हों,लेकिन यूपी कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे ने उन्हें विपक्षी दलों के साथ आने का न्योता देकर साफ कर दिया है कि इंडिया गठबंधन के द्वार बसपा के लिए खुले हैं।वहीं मायावती ने 15 जनवरी को अपने जन्मदिन पर पत्रकारों से बात की तो उनका रुख़ भी थोड़ा नरम दिखाई दिया।

 

मायावती के संकेत से सियासी हलचल तेज

 

बसपा मुखिया मायावती ने भले ही इंडिया गठबंधन को लेकर अपनी रणनीति साफ नहीं की,लेकिन ईवीएम और एसआईआर का जिक्र कर परोक्ष रूप से कांग्रेस की नीतियों के प्रति परोक्ष रूप से अपना समर्थन जाहिर किया।यहीं नहीं मायावती ने ये भी कहा कि अगर कोई दल सवर्ण वोट उनके पक्ष में ट्रांसफर कर सकता है तो वो भविष्य में गठबंधन कर सकती हैं।

 

दरअसल बसपा मुखिया मायावती अक्सर ये आरोप लगाती रही है कि गठबंधन में बसपा को वोट तो दूसरे दल को मिल जाता है,लेकिन उनकी पार्टी को समर्थन नहीं मिलता। मायावती का इशारा कांग्रेस से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि बीजेपी से नाराज सवर्ण वर्ग को कांग्रेस से दिक्कत नहीं है और मुस्लिम और दलित वोटर भी कांग्रेस से सहज हैं।ऐसे में अगर कांग्रेस मायावती को भरोसे में ले सकती है तो 2027 के विधानसभा चुनाव में यूपी की सियासत में नया समीकरण देखने को मिल सकता है।वहीं दूसरी तरफ अखिलेश यादव की मायावती के प्रति नरमी भी काफी कुछ संकेत दे रही है।

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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