इटावा। शिक्षा के प्रति जज़्बा, संसाधनों की कमी को मात देकर मंज़िल पा लेता है – इसकी ताज़ा मिसाल बनी है अंजुमन हिदायतुल इस्लाम हाई स्कूल के दो छात्र। गुलाम मुहिउद्दीन, जिनके पिता एक हाफिज़ व क़ारी हैं और मदरसा चलाते हैं, ने अपने पहले NEET प्रयास में 617 अंक प्राप्त करके न सिर्फ परीक्षा पास की, बल्कि मेडिकल कॉलेज की राह भी आसान कर ली। वहीं, स्कूल की रसोइया श्रीमती शबनम की बेटी नूर सबा ने भी पहली ही कोशिश में 540 अंक के साथ यह प्रतिष्ठित परीक्षा क्वालीफाई की
यह क़ाबिल-ए-तारीफ़ है कि गुलाम मुहिउद्दीन के पिता धार्मिक शिक्षा से जुड़े हैं, जबकि नूर सबा के माता-पिता दोनों ही हाईस्कूल तक पढ़े हैं – लेकिन इन दोनों परिवारों ने अपनी सीमित पृष्ठभूमि को कभी बोझ नहीं बनने दिया। बल्कि, उनकी शिक्षा के प्रति ललक ने समाज को यह संदेश दिया है कि मेहनत और लगन के आगे हर बाधा छोटी है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य शाहनवाज अतहर और पूरे स्टाफ ने इन दोनों होनहारों का गुलपोशी (फूलों की माला पहनाकर) स्वागत किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की दुआ माँगी। प्राचार्य ने कहा, “ये दोनों छात्र हमारे स्कूल का सिर्फ गौरव नहीं, बल्कि पूरे शहर के लिए मिसाल हैं। इन्होंने साबित किया कि अगर इरादा पक्का हो तो हालात कभी रास्ता नहीं रोक सकते।”
यह खबर खास तौर पर उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सोचते हैं कि संसाधनों के अभाव में बड़े सपने नहीं देखने चाहिए। गुलाम और नूर सबा ने दिखा दिया – सपना देखो, तो पूरा दम लगाकर करो











