अब्दुल्लाह अख़्तर
चुनाव आयोग के भीतर सामने आई आपत्तियों को लेकर कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष (मीडिया विंग) ने पारदर्शिता पर जोर दिया
छिबरामऊ। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर सामने आए सवालों के बीच ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड, उत्तर प्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष (मीडिया विंग) मोहम्मद इरफान ने पूरे मामले में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताई है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से पिछले कुछ समय में आयोग के विभिन्न फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर लिखित आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। इन आपत्तियों में मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण, SIR की प्रक्रिया तथा चुनावी डाटा से जुड़े तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं को लेकर सवाल उठाए जाने की बात सामने आई है।
दावा किया गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने करीब 10 महीने की अवधि में कई मौकों पर आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। रिपोर्ट में कुछ मामलों में फैसले लेने की प्रक्रिया और संबंधित सूचनाओं को लेकर भी सवाल उठाए जाने का उल्लेख है।
रिपोर्ट के अनुसार, नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फ़ॉर्म-6 में किए गए बदलाव को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई। इसके अलावा मतदाता सूची के डाटाबेस और उससे जुड़े आईटी सिस्टम के नियंत्रण को लेकर भी सवाल उठाए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
*एसआईआर और मतदाता सूची को लेकर बढ़ी बहस*
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर पहले से ही विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों की ओर से सवाल उठाए जाते रहे हैं। मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया, दस्तावेजों की जांच तथा अपील की व्यवस्था को लेकर भी सार्वजनिक बहस चल रही है।
इसी बीच पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों और बाद में दाखिल अपीलों का मुद्दा भी चर्चा में रहा। चुनाव आयोग ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आंकड़े पेश किए हैं। अलग-अलग पक्षों की ओर से इस प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग दावे और आपत्तियां सामने आई हैं।
*मोहम्मद इरफान बोले—आरोपों पर फैसला तथ्यों से हो*
ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड, उत्तर प्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष (मीडिया विंग) मोहम्मद इरफान ने कहा कि किसी व्यक्ति को केवल आरोपों के आधार पर दोषी ठहराना उचित नहीं है। ज्ञानेश कुमार को लेकर सार्वजनिक रिपोर्टों में जिन आरोपों और आपत्तियों का उल्लेख किया गया है, उनकी वास्तविक स्थिति तथ्यों और सक्षम संस्थाओं की जांच से सामने आनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “हम अपनी ओर से किसी व्यक्ति पर कोई आरोप नहीं लगा रहे हैं। ज्ञानेश कुमार को लेकर जो सवाल और आपत्तियां सामने आई हैं, वे सार्वजनिक रिपोर्टों और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर चर्चा में आई हैं। इनकी सच्चाई क्या है, यह निष्पक्ष जांच और संबंधित संस्थाओं की प्रक्रिया से स्पष्ट होना चाहिए।”
मोहम्मद इरफान ने कहा कि चुनाव आयोग देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है। मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बुनियाद है, इसलिए इससे जुड़ी किसी भी शिकायत या आपत्ति का तथ्यात्मक और पारदर्शी तरीके से समाधान होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यदि लगाए गए आरोपों में कोई तथ्य नहीं है तो संबंधित पक्ष को दस्तावेजों और तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं यदि किसी प्रक्रिया में नियमों को लेकर वास्तविक सवाल उठे हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
वहीं, चुनाव आयोग की ओर से इन सवालों पर अपना पक्ष भी सामने रखा गया है। आयोग का कहना है कि संस्थागत निर्णय प्रक्रिया में अलग-अलग विचार और टिप्पणियां होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने महत्वपूर्ण फैसले पूर्ण आयोग की प्रक्रिया के तहत लिए जाने तथा SIR से संबंधित फैसलों पर सहमति होने की बात कही है।
ऐसे में ज्ञानेश कुमार को लेकर सामने आए आरोपों, चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों और एसआईआर से जुड़े विवाद पर अब संबंधित पक्षों के स्पष्टीकरण तथा आगे की संस्थागत एवं न्यायिक प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।
— मोहम्मद इरफान
कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष (मीडिया विंग)
ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड, उत्तर प्रदेश
Author: Mohammed irfan













