Explore

Search

September 14, 2026 3:28 am

लेटेस्ट न्यूज़

“सवाल पूछना पत्रकार का अधिकार, कानून हाथ में लेना पुलिस का नहीं” — अब्दुल्ला अख़्तर व फ़िरोज़ वारसी

पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान से समझौता नहीं, निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई
छिबरामऊ (कन्नौज)। दिल्ली के साकेत क्षेत्र में महिला पत्रकारों शाहीन खान और नफीसा खान के साथ पुलिस द्वारा कथित मारपीट किए जाने का मामला सामने आने के बाद पत्रकारिता जगत में भारी रोष व्याप्त है। इस घटना को लेकर पत्रकार एवं ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड, मीडिया विंग उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल्ला अख़्तर और प्रदेश उपाध्यक्ष फ़िरोज़ वारसी ने कड़ी निंदा व्यक्त करते हुए निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड के प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल्ला अख़्तर ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में समाज और शासन-प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी का काम करते हैं। पत्रकारों का मूल दायित्व जनता से जुड़े मुद्दों को सामने लाना और जिम्मेदारों से सवाल पूछना है। ऐसे में महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट या अभद्र व्यवहार का मामला बेहद गंभीर और चिंताजनक है।
उन्होंने आगे कहा कि सामने आई जानकारी के मुताबिक दोनों महिला पत्रकारों ने पुलिस पर हिरासत के दौरान मारपीट के गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच बेहद आवश्यक है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
*सीसीटीवी और मेडिकल रिपोर्ट से सच आए सामने: अब्दुल्ला अख़्तर*
अब्दुल्ला अख़्तर ने मांग की कि घटनास्थल और संबंधित थाने की सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच कराई जाए। इसके साथ ही पीड़ित महिला पत्रकारों की मेडिकल रिपोर्ट, पुलिसकर्मियों के बयान और प्रत्यक्षदर्शियों के साक्ष्यों को जांच में शामिल किया जाना चाहिए। यदि जांच में पुलिसकर्मियों द्वारा मारपीट की पुष्टि होती है, तो उनके खिलाफ बिना किसी दबाव के विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
*लोकतंत्र में सवाल पूछने का अधिकार छीना नहीं जा सकता: फ़िरोज़ वारसी*
मामले पर रोष जताते हुए ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड (मीडिया विंग) के प्रदेश उपाध्यक्ष फ़िरोज़ वारसी ने कहा कि पत्रकारों की स्वतंत्रता और सुरक्षा लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल आधार है। विशेषकर कार्यक्षेत्र में महिला पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
फ़िरोज़ वारसी ने कहा, “यदि पत्रकारिता के दौरान किसी नियम का उल्लंघन होता है तो उसके लिए कानून के मुताबिक प्रक्रिया अपनाई जा सकती है, लेकिन पुलिस द्वारा किसी भी स्थिति में हाथ उठाना या अनावश्यक बल प्रयोग करना सरासर गलत और असंवैधानिक है। हम इस घटना की पुरजोर शब्दों में निंदा करते हैं। निष्पक्ष जांच के बाद जो भी पुलिसकर्मी दोषी पाए जाएं, उन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी रक्षक बनकर भक्षक बनने की हिम्मत न करे।”
अब्दुल्ला अख़्तर और फ़िरोज़ वारसी ने संयुक्त रूप से कहा कि किसी भी पत्रकार को अपनी जिम्मेदारी निभाने के दौरान डर या दबाव के माहौल में काम नहीं करना चाहिए। प्रशासन को पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करते हुए इस मामले में पारदर्शी तरीके से कार्रवाई करनी होगी।

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

Live Tv
विज्ञापन
लाइव क्रिकेट स्कोर