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September 23, 2026 11:15 am

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रोजा सिर्फ भूख प्यास का नहीं, बल्कि आत्मसंयम और आध्यात्मिक उन्नति का फरहान शकील 

इटावा : समाजवादी पार्टी के अल्पसंख्यक सभा के जिला अध्यक्ष फरहान शकील ने रमजान के पवित्र महीने के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि रोजा सिर्फ भूखा और प्यासा रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, धैर्य और आध्यात्मिक उन्नति का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। फरहान शकील ने कहा रोजा हमें सिर्फ शारीरिक रूप से नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी मजबूत बनाता है। यह महीना हमें अपनी इच्छाओं और भावनाओं को नियंत्रित करने का अभ्यास कराता है। रोजे के दौरान हम न सिर्फ खाने-पीने से परहेज करते हैं, बल्कि गलत विचारों, नकारात्मकता और बुरे कर्मों से भी दूर रहते हैं। यह अल्लाह के करीब जाने और उनकी रहमत पाने का सबसे अच्छा तरीका है।उन्होंने आगे कहा कि रमजान का महीना समाज में एकता, भाईचारे और सहयोग की भावना को बढ़ावा देता है। यह महीना हमें गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने के लिए प्रेरित करता है। फरहान शकील ने लोगों से अपील की कि वे इस पवित्र महीने का पूरा लाभ उठाएं और न सिर्फ अपने लिए, बल्कि समाज के लिए भी बेहतर इंसान बनने का प्रयास करें। उन्होंने यह भी कहा कि रोजा हमें धैर्य और संयम का पाठ पढ़ाता है, जो जीवन के हर पहलू में उपयोगी है। चाहे वह व्यक्तिगत जीवन हो या सामाजिक जिम्मेदारियां, रोजा हमें हर स्थिति में संतुलन बनाए रखने की शिक्षा देता है।फरहान शकील के इस बयान ने लोगों के बीच रमजान के महत्व को और गहराई से समझने का अवसर प्रदान किया है। उन्होंने इस पवित्र महीने को सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक जीवनशैली के रूप में देखने का संदेश दिया है। इस तरह, फरहान शकील ने रमजान के आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व को रेखांकित करते हुए लोगों को इस महीने का सही अर्थ समझाने का प्रयास किया है।

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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