इटावा। शहर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर लालपुरा में पर्वाधिराज पर्युषण (दशलक्षण) महापर्व के अंतर्गत धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला जारी है। पट्टाचार्य आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री 108 विशल्य सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में महापर्व के छठवें दिन श्रद्धालुओं ने उत्तम संयम धर्म की आराधना के साथ सुगंध दशमी का पूजन किया।प्रातःकाल मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने विधि-विधानपूर्वक श्रीजी का अभिषेक किया। इसके बाद मुनिश्री के मुखारविंद से शांतिधारा संपन्न हुई। मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों द्वारा आचार्य श्री 108 विराग सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण किया गया। भिंड से आए श्रद्धालुओं को मुनिश्री के चरण प्रक्षालन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। धार्मिक अनुष्ठान में पुरुष श्रद्धालु पीले वस्त्र धारण कर इंद्र के रूप में शामिल हुए।मुनि श्री विशल्य सागर जी महाराज ने उत्तम संयम धर्म की महत्ता बताते हुए कहा कि संयम आत्मकल्याण का मार्ग है।

इंद्रियों और मन पर नियंत्रण रखते हुए जीवन को धर्म, साधना और सदाचार से जोड़ना ही संयम की वास्तविक साधना है।सायंकाल श्रीजी एवं मुनिश्री की भव्य महाआरती की गई। आगामी 1 से 9 अक्टूबर तक होने वाले श्री इंद्रध्वज महामंडल विधान एवं विश्वशांति महायज्ञ की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। विधान में शामिल होने वाले इंद्र-इंद्राणियों को मुनिश्री का मंगल आशीर्वाद प्राप्त हुआ। चातुर्मास कमेटी अध्यक्ष संजू जैन ठेकेदार, विवेक जैन, रीतेश जैन एवं बंटी जैन बनारस द्वारा वस्त्र वितरित किए गए।

इसके बाद शची महिला मंडल कटरा द्वारा ‘महावीर का वैराग्य’ कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया, जिसमें महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों से मंदिर परिसर देर शाम तक भक्तिमय बना रहा। कार्यक्रम का मंच संचालन ब्रह्मचारिणी अलका दीदी ने किया।इस अवसर पर स्वर्णिम वर्षायोग साधु सेवा समिति के पदाधिकारी अनूप जैन, पूरन जैन, दिलीप जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।सुगंध दशमी के अवसर पर पंसारी टोला, बरहीपुरा, करनपुरा, सरायशेख, एसडी फील्ड, छिपैठी, नशियां जी, डांडा सहित शहर के विभिन्न जैन मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने विधि-विधानपूर्वक सुगंध दशमी का पूजन किया। मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान, पूजन-अर्चन एवं आरती के साथ वातावरण भक्तिमय बना रहा।
Author: Mohammed irfan













