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October 12, 2026 12:24 pm

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हश्र में फिर मिलेंगे दोस्तों, बस यह पैगाम है आखिरी…”

आज जुनैद तैमूरी की पुण्यतिथि पर जब ये पंक्तियां याद आती हैं, तो आंखें नम हो जाती हैं। इटावा ही नहीं, पूरे पत्रकारिता जगत ने एक ऐसा शख्स खो दिया था, जिसकी कलम में जिम्मेदारी थी, और व्यवहार में अपनापन। तीन साल बाद भी उनकी यादें आज भी ताजा हैं।

खबर उनके लिए सिर्फ खबर नहीं, जिम्मेदारी थी

जुनैद तैमूरी की लेखनी की सबसे बड़ी खूबी थी — उसकी विश्वसनीयता। दशकों तक पत्रकारिता की, लेकिन उनकी खबरों पर सवाल उठाना आसान नहीं था। आम आदमी की समस्या हो, शासन-प्रशासन का मुद्दा हो या देश-प्रदेश की बड़ी राजनीतिक घटना — हर विषय को वे अपनी पैनी नजर से देखते थे।

बड़े समाचार समूहों में निभाई अहम जिम्मेदारियां

अमर उजाला, नवभारत, पंजाब केसरी जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में अपनी सेवाएं दीं। सांध्य दैनिक डीएलए से भी उनका गहरा जुड़ाव रहा। सीमित संसाधनों के दौर से लेकर आधुनिक पत्रकारिता तक का सफर उन्होंने अपनी आंखों से देखा।

मुलायम सिंह यादव से पारिवारिक रिश्ते तक पहुंची आत्मीयता

पत्रकारिता के दौरान स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव से बनी आत्मीयता धीरे-धीरे पारिवारिक रिश्तों में बदल गई। विश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर, देवीलाल, आई.के. गुजराल, नारायण दत्त तिवारी, मायावती, शीला दीक्षित, दिग्विजय सिंह, सलमान खुर्शीद, कांशीराम सहित अनेक दिग्गजों से उनके आत्मीय संबंध रहे।

अधिकारी भी लेते थे खबरों की जानकारी

शासन-प्रशासन के बड़े अधिकारी भी उनसे जनपद की गतिविधियों की जानकारी लिया करते थे। खबरों का व्यापक नेटवर्क और मजबूत पहुंच — यही वजह थी कि कोई भी बड़ी घटना होते ही वे सबसे पहले सक्रिय दिखाई देते थे।

हर किसी के काम आने वाले इंसान

परिचित हो या अपरिचित — जरूरत के समय किसी के काम आना उनकी आदत में शामिल था। युवा पत्रकारों को मार्गदर्शन देना हो या किसी जरूरतमंद की मदद — वे हमेशा आगे रहते थे। शायद यही कारण है कि उनके निधन को केवल पत्रकारिता जगत नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग ने अपनी निजी क्षति के रूप में महसूस किया।

तीन साल बाद भी यादों में जिंदा

उनकी आवाज, बेबाक बातचीत, खबरों को लेकर बेचैनी और हर परिस्थिति में आगे बढ़ने का जज्बा — आज भी उनके साथ काम करने वालों की स्मृतियों में सुरक्षित है।

समय गुजरता जाता है, चेहरे बदलते जाते हैं, पीढ़ियां आगे बढ़ती जाती हैं — लेकिन कुछ नाम समय की सीमाओं से परे हो जाते हैं। जुनैद तैमूरी भी ऐसा ही एक नाम हैं।

“हश्र में फिर मिलेंगे दोस्तों, बस यह पैगाम है आखिरी…”

🙏 जुनैद तैमूरी को विनम्र श्रद्धांजलि 🙏

 

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Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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