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October 23, 2026 5:49 pm

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ओलावृष्टि और झमाझम बारिश से बदला बरेली का मौसम, खेतों में खड़ी धान की फसल पर मंडराया संकट

ओलावृष्टि और झमाझम बारिश से बदला बरेली का मौसम, खेतों में खड़ी धान की फसल पर मंडराया संकट

तेज हवाओं, गरज-चमक और ओलों ने बढ़ाई किसानों की चिंता, कटाई के मुहाने पर खड़ी फसल को नुकसान की आशंका

बुधवार शाम अचानक मौसम ने करवट बदली और देखते ही देखते आसमान घने काले बादलों से ढक गया। कुछ ही देर में तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश शुरू हो गई। कई क्षेत्रों में बारिश के साथ ओलावृष्टि होने से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया। गरज-चमक, तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश के बीच देर शाम तक रुक-रुककर वर्षा का दौर जारी रहा। अचानक बदले मौसम से जहां शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हुआ, वहीं खेतों में खड़ी फसलों को लेकर किसानों की चिंता गहरा गई।

ओलावृष्टि ने बढ़ाई किसानों की बेचैनी

वर्तमान समय किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि अनेक क्षेत्रों में धान की फसल पककर कटाई के लिए तैयार खड़ी है। ऐसे समय में तेज बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि और हवा ने किसानों की मेहनत पर संकट खड़ा कर दिया है। खेतों में तैयार धान की बालियों पर ओले पड़ने तथा तेज हवा चलने से फसल के गिरने, दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने और उत्पादन में कमी आने की आशंका जताई जा रही है। बरेली मंडल के शाहजहांपुर और पीलीभीत जनपदों में भी धान की कटाई का कार्य शुरू हो चुका है। ऐसे में मौसम का लगातार प्रतिकूल रहना किसानों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है। किसानों का कहना है कि यदि आगामी दिनों में भी इसी प्रकार बारिश और तेज हवाओं का सिलसिला जारी रहा तो खेतों में खड़ी तथा कटाई के बाद सूखने के लिए रखी फसल को भी नुकसान हो सकता है।

पहले की बारिश ने भी किसानों को दिया था झटका

बरेली जनपद के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले दिनों हुई लगातार बारिश और तेज हवाओं के कारण कई खेतों में धान की फसल जमीन पर गिर चुकी है। फसल के गिर जाने से उसकी कटाई में अतिरिक्त श्रम और लागत लगने के साथ-साथ गुणवत्ता प्रभावित होने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं गन्ने की फसल पर भी तेज हवाओं का असर देखने को मिला है।

लगातार बारिश के कारण खेतों में जलभराव की स्थिति बनने से दलहनी एवं तिलहनी फसलों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। अधिक नमी के चलते फसलों में सड़न, फंगस और अन्य रोगों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में बुधवार की ओलावृष्टि और तेज बारिश ने पहले से मौसम की मार झेल रहे किसानों की परेशानियों में और इजाफा कर दिया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आगामी दिनों में भी बरेली सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना बनी हुई है। 7 से 9 अक्टूबर के बीच वर्षा के दौर के साथ तेज हवा, मेघगर्जन और वज्रपात की स्थिति बनने की संभावना को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। किसानों के लिए भी आगामी कुछ दिन विशेष सावधानी बरतने वाले हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार किसानों को मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखते हुए फसल की कटाई, सुखाने और भंडारण से संबंधित कार्य मौसम के अनुकूल समय देखकर करने चाहिए। खेतों में जलभराव की स्थिति होने पर निकासी की व्यवस्था करना भी आवश्यक है।

अचानक हुई बारिश से मौसम में ठंडक घुल गई और तापमान में गिरावट महसूस की गई। लंबे समय से उमस और गर्मी से परेशान लोगों को बारिश से राहत मिली। सड़कों और खुले स्थानों पर पानी भरने से कुछ क्षेत्रों में आवागमन भी प्रभावित हुआ। हालांकि आम लोगों के लिए बारिश राहत लेकर आई, लेकिन किसानों के लिए यही बारिश चिंता का कारण बन गई है।धान की फसल इस समय कटाई के महत्वपूर्ण चरण में है। ऐसे में लगातार बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवा का सीधा असर फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर पड़ सकता है। हालांकि अभी नुकसान का वास्तविक आंकलन करना जल्दबाजी होगी। मौसम साफ होने के बाद कृषि विभाग एवं संबंधित अधिकारियों द्वारा खेतों का निरीक्षण और सर्वे किए जाने के पश्चात ही फसलों को हुई क्षति की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल बरेली के किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं और यही प्रार्थना कर रहे हैं कि मौसम जल्द सामान्य हो, ताकि महीनों की मेहनत से तैयार हुई उनकी धान की फसल सुरक्षित घर तक पहुंच सके।

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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