रिपोर्ट शिबम दुवे
इटावा आधुनिकता के इस दौर में भले ही मासूम बचपन श्री रामकथा की गूढ़ गहराई या पौराणिक आख्यानों की बारीकियों से पूरी तरह परिचित न हो, लेकिन विजयादशमी का पावन अवसर आते ही हर दिल में बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश स्पंदित होने लगता है। इसी भावना से सराबोर होकर इटावा में नन्हे बच्चों ने अपने बाल-सुलभ उत्साह के साथ रावण दहन का आयोजन कर समाज को एक बड़ा संदेश दिया। दशहरा केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के मन में यह चिंतन जगाने का अवसर है कि आखिर हर साल रावण के पुतले का दहन क्यों किया जाता है। यह परंपरा हमें स्मरण कराती है कि जब-जब धर्म पर अधर्म हावी होने का प्रयास करता है, तब-तब प्रभु श्री राम के सत्य और सदाचार के मार्ग की ही जीत होती है। रावण परम ज्ञानी और वेद-शास्त्रों का मर्मज्ञ था, परंतु उसके विनाश का कारण उसका अत्यधिक अहंकार बना। इटावा के मासूमों द्वारा किया गया यह सांकेतिक दहन इस बात का जीवंत प्रमाण है कि कर्मफल का सिद्धांत अटल है; अति-अभिमान अंततः सर्वनाश का कारण बनता है और अंत में केवल सत्य ही परम पद को प्राप्त करता है।
Author: Mohammed irfan













