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October 23, 2026 1:19 am

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पीडीए सम्मेलन में खाली कुर्सियां देख नाराज हुए अखिलेश यादव, कन्नौज में सपा जिलाध्यक्ष समेत पूरी कार्यकारिणी भंग

अब्दुल्लाह अख़्तर

सम्मेलन में अपेक्षित भीड़ नहीं जुटने और संगठन की तैयारियों में कमी को कार्रवाई की वजह बताया गया; 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के संगठनात्मक कामकाज पर उठे सवाल

कन्नौज। समाजवादी पार्टी में संगठनात्मक फेरबदल के बीच कन्नौज जिले में जिलाध्यक्ष समेत पूरी जिला कार्यकारिणी को भंग किए जाने का मामला चर्चा में है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जिले में आयोजित पीडीए सम्मेलन के दौरान अपेक्षित भीड़ नहीं जुटने और मंच के सामने खाली कुर्सियां दिखाई देने से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव नाराज हो गए थे। इसके बाद जिलाध्यक्ष और जिला कार्यकारिणी के खिलाफ कार्रवाई की गई।

रिपोर्टों में इस कार्रवाई को सम्मेलन की कमजोर तैयारियों और आयोजन में लापरवाही से जोड़कर बताया गया है। हालांकि, कार्रवाई के पीछे के सभी तथ्यों और पार्टी नेतृत्व की आधिकारिक टिप्पणी को अलग-अलग समझना जरूरी है। प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल की ओर से 18 अक्टूबर 2026 को जारी कार्यालय आदेश में कन्नौज की जिला कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसमें जिला संगठन के साथ फ्रंटल संगठनों की इकाइयां भी शामिल हैं।

सम्मेलन में खाली कुर्सियों ने बढ़ाई संगठन की मुश्किलें

कन्नौज में पीडीए सम्मेलन को पार्टी के संगठनात्मक जनसंपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा था। कार्यक्रम में लोगों की भागीदारी और आयोजन की तैयारियों को लेकर पार्टी नेतृत्व की अपेक्षाएं थीं। लेकिन मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सम्मेलन में अपेक्षित भीड़ नहीं जुट सकी और मंच के सामने खाली कुर्सियां दिखाई दीं। इसे लेकर अखिलेश यादव की नाराजगी की बात सामने आई है।

इससे संगठन की तैयारियों, कार्यकर्ताओं को जुटाने की क्षमता और स्थानीय स्तर पर कार्यक्रमों के प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े हुए। हालांकि, सम्मेलन में कम उपस्थिति के पीछे क्या परिस्थितियां थीं और इसके लिए किस स्तर पर जिम्मेदारी तय की गई, इस बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

जिलाध्यक्ष कलीम खान के नेतृत्व में हुआ था पीडीए सम्मेलन

17 अक्टूबर को कन्नौज शहर के नसरापुर स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में जिलाध्यक्ष कलीम खान के नेतृत्व में पीडीए सम्मेलन आयोजित किए जाने की खबर प्रकाशित हुई थी। इस कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों का मुद्दा उठाया और पात्र मतदाताओं को जागरूक करने पर जोर दिया था।

इसके अगले दिन जिला कार्यकारिणी को भंग किए जाने का आदेश सामने आया। घटनाक्रम के इस क्रम ने कार्रवाई को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज कर दी हैं। हालांकि, सम्मेलन के आयोजन और कार्यकारिणी भंग करने के बीच संबंध को लेकर सामने आई रिपोर्टों से संकेत तो मिलते हैं, लेकिन पार्टी की ओर से जारी आदेश में विस्तृत कारणों का उल्लेख उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं है।

जिलाध्यक्ष से लेकर फ्रंटल संगठनों तक कार्रवाई का दायरा

प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल के आदेश के तहत कन्नौज की जिला कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग किया गया। कार्रवाई का दायरा केवल जिलाध्यक्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारियों और सदस्यों के साथ पार्टी के फ्रंटल संगठनों की जिला इकाइयों को भी इसमें शामिल किया गया।

इस फैसले के बाद जिले में पार्टी संगठन को नए सिरे से गठित करने की जरूरत होगी। नई टीम में किन नेताओं को जिम्मेदारी मिलेगी और संगठन की कमान किसे सौंपी जाएगी, इसको लेकर अब पार्टी कार्यकर्ताओं की नजर प्रदेश नेतृत्व के अगले निर्णय पर रहेगी। फिलहाल नई कार्यकारिणी के गठन की तारीख और पदाधिकारियों के नामों की आधिकारिक घोषणा की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट से नहीं होती।

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन के सामने बड़ी चुनौती

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दल जिला और बूथ स्तर पर अपने संगठन को सक्रिय करने में जुटे हैं। ऐसे समय में कन्नौज जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिले में पूरी जिला कार्यकारिणी भंग होना संगठन के लिए अहम घटनाक्रम है।

समाजवादी पार्टी के सामने अब नई टीम के गठन के साथ कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाने, जनसंपर्क मजबूत करने और पार्टी के कार्यक्रमों में भागीदारी सुनिश्चित करने की चुनौती होगी। सम्मेलन में कम उपस्थिति को लेकर सामने आई रिपोर्टों के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि आगामी कार्यक्रमों के लिए संगठनात्मक तैयारियों और जिम्मेदारियों का निर्धारण किस तरह किया जाएगा।

हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि कार्यकारिणी भंग करने का उद्देश्य केवल आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी है। इसके लिए पार्टी नेतृत्व की स्पष्ट प्रतिक्रिया और आधिकारिक आदेश में दर्ज कारणों की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

अब किन सवालों के जवाब का इंतजार?

क्या पीडीए सम्मेलन में कम भीड़ जुटना ही कार्रवाई का प्रमुख कारण था?

क्या प्रदेश नेतृत्व ने जिला संगठन से सम्मेलन की तैयारियों को लेकर जवाब मांगा था?

क्या कार्यकारिणी भंग करने से पहले संगठन की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई थी?

नई जिला कार्यकारिणी का गठन कब होगा और जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी किसे मिलेगी?

इन सवालों पर पार्टी नेतृत्व और संबंधित पदाधिकारियों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद पूरे घटनाक्रम की तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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