रिपोर्ट इकरार अहमद
इटावा, 31 अगस्त 2026 – इटावा सफारी पार्क में विगत डेढ़ महीने से जीवन-मरण की लड़ाई लड़ रही बब्बर शेरनी राधिका (उम्र लगभग 9 वर्ष) का आज तड़के सुबह 4:30 बजे निधन हो गया। प्रशासन ने उसे बचाने की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन मल्टी-ऑर्गन फेलियर उसे जीत न सका।
क्या था पूरा मामला?
· 8 जुलाई 2026: राधिका की पूँछ को दूसरी बब्बर शेरनी नीरजा ने काट लिया।
· तत्काल कार्रवाई: मथुरा के पं. दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय से विशेषज्ञ बुलाए गए, सफारी के वन्यजीव चिकित्सकों ने इलाज शुरू किया।
· ऑपरेशन: संक्रमण के डर से राधिका की पूँछ को काट कर छोटा किया गया।
· खुद को भी नुकसान: 9 जुलाई को उसने खुद ही कई बार पूँछ काटी और इलाज के दौरान तीन बार टाँके तोड़े
इससे उपचार और मुश्किल हो गया।
अंतिम 52 दिन – हर पल निगरानी में
सफारी प्रशासन और विशेषज्ञों की टीम ने 24×7 निगरानी रखी, लेकिन राधिका की शारीरिक स्थिति लगातार गिरती गई। आज सुबह उसने अंतिम साँस ली। मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), लखनऊ को सूचना देने के बाद पशुचिकित्सकों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया।
पोस्टमार्टम में चौंकाने वाले निष्कर्ष
· प्रारंभिक रिपोर्ट: अत्यधिक कमजोरी के कारण मल्टी ऑर्गन फेलियर से मौत (संभावित)।
· अहम खुलासा: पेट व आँतों में असामान्य मात्रा में हवा/गैस भरी हुई मिली।
· अगली कड़ी: विसरा (आंतरिक अंगों के नमूने) को IVRI बरेली भेजा जा रहा है – ताकि मौत की असली वजह पता चल सके।
कौन थी राधिका?
· 2019 में गुजरात से इटावा सफारी लाई गई थी।
· शारीरिक अक्षमता और असामान्य व्यवहार के कारण उसे कभी पर्यटकों के सामने नहीं खोला गया, न ही ब्रीडिंग में इस्तेमाल किया गया।
सफारी निदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने पुष्टि करते हुए कहा, “हमारी पूरी टीम ने 52 दिन अथक प्रयास किया, लेकिन वह नहीं बच पाई। अब IVRI रिपोर्ट का इंतज़ार है।”
Author: Mohammed irfan













