इटावा जिला अस्पताल का पैथोलॉजी विभाग मरीजों को बेहतर और अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। सीएमएस डॉ परितोष शुक्ला ने बताया अब स्थानीय मरीजों को गंभीर और महंगे टेस्ट कराने के लिए बड़े शहरों की दौड़ लगाने या निजी सेंटरों पर जेब ढीली करने की कतई आवश्यकता नहीं है। अस्पताल प्रशासन ने इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए विभाग में दो नई अत्याधुनिक सेलेक्ट्रा बायोकेमिस्ट्री मशीनें स्थापित की हैं। इन नई मशीनों की मदद से अब एलएफटी (लिवर फंक्शन टेस्ट), केएफटी (किडनी फंक्शन टेस्ट), शुगर और इलेक्ट्रोलाइट्स जैसी बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील जांचें बहुत ही कम समय में पूरी सटीकता के साथ की जा रही हैं।
इस आधुनिक अपग्रेडेशन के बाद वर्तमान में पैथोलॉजी विभाग में लगभग 80 प्रकार के टेस्ट किए जा रहे हैं। सबसे राहत की बात यह है कि इनमें से करीब 25 टेस्ट ऐसे हैं जो पहले केवल बड़े चिकित्सा संस्थानों या मेडिकल कॉलेजों में ही मुमकिन थे और निजी लैब में इनके लिए भारी-भरकम रकम चुकानी पड़ती थी। अब ये सभी जांचें जिला अस्पताल में ही पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। यही वजह है कि अस्पताल की पैथोलॉजी पर मरीजों का भरोसा और दबाव लगातार बढ़ रहा है। आंकड़ों की बात करें तो रोजाना लगभग 350 मरीजों की करीब 5000 जांचें प्रतिदिन की जा रही हैं, जिससे मासिक आंकड़ा सवा लाख से डेढ़ लाख जांचों तक पहुंच रहा है।
डिजिटल सेवा को बढ़ावा देने और मरीजों को कतारों से मुक्ति दिलाने के लिए अस्पताल ने एक और शानदार पहल की है। अब मरीजों या उनके तीमारदारों को जांच रिपोर्ट लेने के लिए अस्पताल के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विभाग द्वारा जांच रिपोर्ट सीधे मरीजों के व्हाट्सएप और एसएमएस के जरिए उनके मोबाइल फोन पर भेजी जा रही है, जिससे उनकी अनावश्यक भागदौड़ पूरी तरह खत्म हो गई है। सीमित संसाधनों और स्टाफ की कमी के बावजूद यह पैथोलॉजी विभाग बेहतरीन प्रबंधन की मिसाल पेश कर रहा है। पैथोलॉजी प्रभारी डॉ. नीतू द्विवेदी, माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. नितिन कुमार सिंह और पैथोलॉजिस्ट डॉ. शिवानी गुप्ता की देखरेख में पूरा स्टाफ मुस्तैदी से काम कर रहा है। डॉक्टरों की इसी कड़ी निगरानी और मुस्तैदी के कारण ही इतनी बड़ी संख्या में टेस्ट समय पर और पूरी सटीकता के साथ संपन्न हो पा रहे हैं।











