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July 27, 2026 12:42 pm

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इटावा के औद्योगिक कायाकल्प का संकल्प: नवीन दुबे की वाहन रैली ने फूंका विकास का शंखनाद

इटावा की सड़कों पर आज उत्साह और उम्मीदों का एक अनूठा संगम देखने को मिला, जब इटावा विकास मंच के संस्थापक नवीन दुबे एडवोकेट के नेतृत्व में एक विशाल वाहन रैली निकाली गई। सैकड़ों मोटर साइकिलों और कारों के काफिले के साथ निकली इस रैली ने न केवल शहर की धड़कनें बढ़ा दीं, बल्कि जनपद के सुनहरे भविष्य की एक नई पटकथा भी लिख दी। युवा जोश और महिलाओं की भागीदारी से सजी इस रैली का व्यापारियों और आम जनमानस ने जगह-जगह फूल-मालाओं से जोरदार स्वागत किया, जो इस बात का प्रमाण है कि इटावा अब बदलाव की राह देख रहा है।

​रैली के समापन पर नगर मजिस्ट्रेट के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए नवीन दुबे ने विकास का एक ऐसा रोडमैप प्रस्तुत किया, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि यदि सरकार इटावा और इसके पड़ोसी जिलों को विशेष औद्योगिक जोन घोषित कर बुनियादी ढांचा प्रदान करे, तो वे स्वयं 20 हजार करोड़ रुपये का निवेश और उद्योग यहाँ लाने की क्षमता रखते हैं। उनका यह विजन इटावा के उन हजारों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो रोजगार की तलाश में अपनों से दूर जाने को मजबूर हैं।

​नवीन दुबे ने न केवल बड़े उद्योगों की बात की, बल्कि समाज के हर वर्ग के दर्द को अपनी आवाज दी। आलू किसानों की दयनीय स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने उनके पसीने की सही कीमत दिलाने की मांग की, ताकि किसानों को अपने ही खेतों में खड़ी फसल को जोतने पर मजबूर न होना पड़े। इसके साथ ही उन्होंने शहर की बुनियादी सुविधाओं में सुधार के लिए महिलाओं के लिए पिंक टॉयलेट के निर्माण, स्मार्ट मीटर के नाम पर हो रही आर्थिक लूट को बंद करने और इटावा को एक ‘आईटी हब’ के रूप में विकसित करने का पुरजोर आह्वान किया।

​संबोधन के दौरान एक भावुक पल तब आया जब नवीन दुबे ने अपने संघर्ष के दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि 1988 में नोएडा में रोजगार तलाशते समय उन्हें कई दिन गन्ने के रस के साथ ब्रेड खाकर गुजारने पड़े थे। उन्होंने संकल्प लिया कि जो संघर्ष उन्होंने झेला, वह इटावा की नई पीढ़ी को नहीं झेलने देंगे। अधिवक्ताओं और गणमान्य नागरिकों के भारी समर्थन के बीच, इस गैर-राजनीतिक आंदोलन को इटावा के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। जनसमूह की तालियों की गड़गड़ाहट गवाह थी कि इटावा को अब ऐसा नेतृत्व मिल चुका है जो न केवल समस्याओं को समझता है, बल्कि उनके समाधान का साहस भी रखता है।

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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