इटावा/मेरठ: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के नेतृत्व में चलाए जा रहे “ज्ञापन दो अभियान” के तहत आज प्रदेश भर के कई विधायकों और जनप्रतिनिधियों को निजीकरण के विरोध में ज्ञापन सौंपे गए। इस दौरान ऊर्जा राज्य मंत्री सोमेंद्र तोमर सहित कई विधायकों से मिलकर उन्हें निजीकरण के दुष्परिणामों से अवगत कराया गया। 
जसवंतनगर विधायक शिवपाल यादव को ज्ञापन
संयुक्त संघर्ष समिति, इटावा के संयोजक विवेक कुमार सिंह, सह-संयोजक आनंद पाल, उपखंड अधिकारी गगन अग्निहोत्री, राहुल कुमार, पीयूष मौर्य, अवर अभियंता संघ के सचिव वीरेंद्र, कार्यालय सहायक संघ के अध्यक्ष राम जी और प्राविधिक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष मदन यादव ने जसवंतनगर के विधायक शिवपाल यादव को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने बताया कि निजीकरण से बिजली वितरण प्रणाली में गंभीर समस्याएं उत्पन्न होंगी और आम उपभोक्ताओं को महंगी बिजली का सामना करना पड़ेगा।
25,000 संविदा कर्मियों की बर्खास्तगी से आक्रोश
संघर्ष समिति ने बताया कि1 मई से विद्युत वितरण निगमों द्वारा 25,000 से अधिक संविदा कर्मियों को बिना किसी पूर्व सूचना के निकाला जा रहा है, जिससे पूरे प्रदेश में कर्मचारियों में गुस्सा फैला हुआ है। समिति ने आरोप लगाया कि यह कदम निजी कंपनियों के हित में उठाया जा रहा है, जिससे भीषण गर्मी में बिजली आपूर्ति प्रभावित होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रबंधन ने अपना रुख नहीं बदला, तो आंदोलन और तेज होगा।
मजदूर दिवस पर बाइक रैली, फिर शुरू होगा आंदोलन
संघर्ष समिति ने घोषणा की कि 1 मई (मजदूर दिवस) के अवसर पर प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजनाओं पर बाइक रैली निकाली जाएगी, जिसमें निजीकरण के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी। रैली शाम 5:00 बजे शुरू होगी और इसमें कर्मचारी कटआउट, स्टीकर और हेलमेट पर नारे लगाकर जनता को जागरूक करेंगे। समिति ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार और प्रबंधन ने 5 महीने से चल रहे शांतिपूर्ण विरोध को नहीं सुना, तो 2 मई से आंदोलन तेज कर दिया जाएगा।
ऊर्जा मंत्री और विधायकों को ज्ञापन
के दौरान मेरठ में ऊर्जा राज्य मंत्री सोमेंद्र तोमर को भी ज्ञापन सौंपा गया। इसके अलावा, किठौर के विधायक शाहिद मंजूर, सिवाल खास के विधायक गुलाम मोहम्मद, बिंदकी के विधायक जयकुमार जैकी और छानबे की विधायक रिकी कोल सहित अनेक जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर निजीकरण के खिलाफ मांगों को रखा गया। समिति ने कहा कि 15 मई तक यह अभियान जारी रहेगा और सभी सांसदों व विधायकों को ज्ञापन दिए जाएंगे।
भ्रष्टाचार के आरोप, सरकार चुप क्यों
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि निजीकरण प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है, लेकिन ऊर्जा मंत्री इस पर मौन हैं। उन्होंने कहा कि कंसल्टेंट्स के गलत दस्तावेजों के बावजूद सरकार निजीकरण को बढ़ावा दे रही है, जो जनता के हितों के खिलाफ है।
आगे की रणनीति
– 1 मई: प्रदेशव्यापी बाइक रैली
– 2 मई से: निजीकरण के खिलाफ व्यापक आंदोलन
– 15 मई तक: सभी सांसदों/विधायकों को ज्ञापन
समिति ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार नहीं सुनती, तो बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की होगी।
विवेक कुमार सिंह
संयोजक, विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, इटावा
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