इटावा जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने और मरीजों के साथ-साथ उनके तीमारदारों की सुरक्षा पुख्ता करने के लिए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. शुक्ला ने एक बेहद सराहनीय और सख्त कदम उठाया है। अस्पताल परिसर के कोने-कोने को सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए अब ‘तीसरी आँख’ यानी सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछा दिया गया है। डॉ. शुक्ला का स्पष्ट मानना है कि मानवता के नाते हर व्यक्ति भगवान नहीं हो सकता, लेकिन तकनीक और कैमरों की चौकस निगरानी से व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित जरूर बनाया जा सकता है। उन्होंने कैमरों की इस निगरानी के साथ-साथ सभी स्वास्थ्य कर्मियों को खुद की जिम्मेदारी का अहसास कराने पर भी विशेष जोर दिया है।
मरीजों और उनके तीमारदारों को स्वास्थ्य योजनाओं के प्रति*तीसरी आँख का पहरा, CMS डॉ. शुक्ला का कड़ा रुख, लापरवाही पर डॉक्टरों की खैर नहीं!
इटावा जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने और मरीजों के साथ-साथ उनके तीमारदारों की सुरक्षा पुख्ता करने के लिए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. शुक्ला ने एक बेहद सराहनीय और सख्त कदम उठाया है। अस्पताल परिसर के कोने-कोने को सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए अब ‘तीसरी आँख’ यानी सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछा दिया गया है। डॉ. शुक्ला का स्पष्ट मानना है कि मानवता के नाते हर व्यक्ति भगवान नहीं हो सकता, लेकिन तकनीक और कैमरों की चौकस निगरानी से व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित जरूर बनाया जा सकता है। उन्होंने कैमरों की इस निगरानी के साथ-साथ सभी स्वास्थ्य कर्मियों को खुद की जिम्मेदारी का अहसास कराने पर भी विशेष जोर दिया है।
मरीजों और उनके तीमारदारों को स्वास्थ्य योजनाओं के प्रति जागरूक करने के लिए भी अस्पताल में विशेष इंतजाम किए गए हैं। शासन-प्रशासन के निर्देशानुसार स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जिला अस्पताल के विभिन्न हिस्सों में टीवी स्क्रीन्स लगवाई गई हैं, जिन्हें आम बोलचाल में ‘सरकारी टीवी’ कहा जा रहा है। विशेष रूप से इमरजेंसी और ट्रामा सेंटर में इन टीवी स्क्रीन्स को स्थापित किया गया है ताकि गंभीर मरीजों के साथ आने वाले परिजनों को जरूरी जानकारियाँ और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता आसानी से मिल सके।
इस पूरी मुस्तैदी के बीच डॉ. शुक्ला ने ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले स्टाफ और डॉक्टरों को बेहद कड़े लहजे में चेतावनी दी है। अब इन कैमरों की नजर सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर ही नहीं, बल्कि डॉक्टरों की समय पर उपस्थिति और मरीजों के साथ उनके व्यवहार पर भी रहेगी। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक पुरुष ने साफ लफ्जों में कहा है कि मरीज चाहे अमीर हो या गरीब, हर किसी के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। यदि कोई भी चिकित्सा अधिकारी अपनी ड्यूटी में कोताही बरतता पाया गया, तो कैमरों की फुटेज के साथ सीधे मुख्यमंत्री महोदय को रिपोर्ट भेजी जाएगी और सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
आमतौर पर अधिकारी मीडिया के सामने बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन जब इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक पुरुष डॉ. शुक्ला से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने आत्मप्रशंसा और प्रचार-प्रसार से दूरी बनाते हुए ज्यादा बात करने से परहेज किया। परंतु कहते हैं कि तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं। अस्पताल से सामने आ रही जमीनी हकीकत साफ बयां करती है कि वह बिना किसी दिखावे के गरीब और असहाय मरीजों की सेवा में निरंतर जुटे हैं। उनका यह मौन सेवा भाव और सख्त प्रशासनिक रवैया आज जिला अस्पताल की बदलती सूरत का सबसे बड़ा गवाह बन रहा है। जागरूक करने के लिए भी अस्पताल में विशेष इंतजाम किए गए हैं। शासन-प्रशासन के निर्देशानुसार स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जिला अस्पताल के विभिन्न हिस्सों में टीवी स्क्रीन्स लगवाई गई हैं, जिन्हें बिना बोलचाल में ‘सरकारी टीवी’ कहा जा रहा है। विशेष रूप से इमरजेंसी और ट्रामा सेंटर में इन टीवी स्क्रीन्स को स्थापित किया गया है ताकि गंभीर मरीजों के साथ आने वाले परिजनों को जरूरी जानकारियाँ और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता आसानी से मिल सके।
इस पूरी मुस्तैदी के बीच डॉ. शुक्ला ने ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले स्टाफ और डॉक्टरों को बेहद कड़े लहजे में चेतावनी दी है। अब इन कैमरों की नजर सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर ही नहीं, बल्कि डॉक्टरों की समय पर उपस्थिति और मरीजों के साथ उनके व्यवहार पर भी रहेगी। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक पुरुष ने साफ लफ्जों में कहा है कि मरीज चाहे अमीर हो या गरीब, हर किसी के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। यदि कोई भी चिकित्सा अधिकारी अपनी ड्यूटी में कोताही बरतता पाया गया, तो कैमरों की फुटेज के साथ सीधे मुख्यमंत्री महोदय को रिपोर्ट भेजी जाएगी और सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
आमतौर पर अधिकारी मीडिया के सामने बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन जब इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक पुरुष डॉ. शुक्ला से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने आत्मप्रशंसा और प्रचार-प्रसार से दूरी बनाते हुए ज्यादा बात करने से परहेज किया। परंतु कहते हैं कि तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं। अस्पताल से सामने आ रही जमीनी हकीकत साफ बयां करती है कि वह बिना किसी दिखावे के गरीब और असहाय मरीजों की सेवा में निरंतर जुटे हैं। उनका यह मौन सेवा भाव और सख्त प्रशासनिक रवैया आज जिला अस्पताल की बदलती सूरत का सबसे बड़ा गवाह बन रहा है।











