इटावा बाबा साहेब डॉ० भीमराव अंबेडकर जी की स्मृति में जनपद इटावा के बसरेहर में स्थित बुद्ध,अंबेडकर पार्क पर सफाई अभियान कार्यक्रम प्रदेश आह्वान पर आयोजित किया जिसमें आम आदमी पार्टी के कार्यक्रम में अंकुर कुमार जी,श्रम प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष वसंत कुमार जी, अवनीश कुमार जिला उपाध्यक्ष जीतू वाल्मीकि विधानसभा उपाध्यक्ष, प्रगति जाटव पूर्व जिला सचिव यूथ बिंग,हर्षित जाटव ब्लॉक अध्यक्ष असलम खान अजय मौर्या अभिषेक कुमार मोहित कुमार चंद्रकांत सहित तमाम कार्यकर्ताओं ने इस सफाई अभियान के श्रमदान में अपनी बढ़ चढ़कर सहभागिता दिखाई मौजूद साथियों को दिल की गहराइयों से आभार बहुत-बहुत धन्यवाद, बहुत-बहुत साधुवाद, बहुत-बहुत शुक्रिया!
रचनात्मक सफाई अभियान के बाद संजीव शाक्य जिला अध्यक्ष ने बाबा साहब के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी का जीवन एक प्रेरणादायक गाथा है जिसमें एक व्यक्ति ने सामाजिक अन्याय भेदभाव और छुआछूत जैसी बुराइयों के विरुद्ध लड़ते हुए इतिहास रच दिया उनके आरंभिक जीवन संघर्ष और साफ सफाई छुआछूत व अन्य सामाजिक कुरीतियों को लेकर उनके विचारों को जिला अध्यक्ष संजीव शाक्य ने विस्तार से समझाया उन्होंने बताया की बाबा साहब का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू छावनी में हुआ था उनका पूरा नाम *भीमराव रामजी आंबेडकर* था वे एक महार जाति में जन्मे थे जिसे उस समय अछूत जाति माना जाता था उनके पिता राम जी मालोजी सकपाल अंग्रेजी सेना में सूबेदार के पद पर थे उन्होंने अपने बच्चों को पढ़ाने में पूरी रुचि ली लेकिन समाज में पहले से मौजूद जातिगत भेदभाव से उनको अत्यंत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बाबा साहब को स्कूल में बैठने की अनुमति नहीं दी जाती थी उन्हें अलग से बैठाया जाता था पानी तक खुद नहीं छूने दिया जाता था इस प्रकार का व्यवहार उनके बालक मान पर गहरी छाप छोड़ गया फिर उन्होंने संघर्ष का रास्ता चुना उन्होंने एल्फिंस्टन कॉलेज से स्नातक किया और बाद में अमेरिका की कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल आफ इकोनॉमिक्स से उच्च शिक्षा प्राप्त की वे अर्थशास्त्र राजनीति और कानून में विशेषज्ञ बने और अपने ज्ञान का उपयोग सामाजिक परिवर्तन के लिए किया बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर केवल छुआछूत और जातिवाद के ही नहीं बल्कि समाज में फैली अनेकों अनेक अन्य सामाजिक कुरीतियों के भी प्रखर विरोधी थे उनका विचार था कि जब तक समाज में समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व की भावना नहीं आएगी तब तक एक सच्चा लोकतंत्र स्थापित नहीं हो सकता
साथ ही जिला उपाध्यक्ष भाई अंकुर कुमार जी ने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर धार्मिक रूढ़िवाद आडंबर अंधविश्वास और पाखंड का खुलकर विरोध किया करते थे वह मानते थे कि धर्म का उद्देश्य मानव कल्याण के लिए होना चाहिए ना कि गुलामी या भेदभाव के लिए । बाबा साहब कहते थे मैं ऐसा धर्म मानता हूं जो स्वतंत्रता समानता और बंधुत्व सिखाता है
श्रम प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष बसंत कुमार जी ने अपने विचार रखते हुए बताया की बाबा साहब स्त्री स्वतंत्रता और समान अधिकारों के पक्षधर थे उन्होंने हिंदू कोड बिल का मसौदा तैयार किया जिसमें महिलाओं को संपत्ति में अधिकार, तलाक का अधिकार, गोद लेने का अधिकार और शिक्षा व नौकरी में समानता की बात कही थी “उनका मानना था” *एक समाज तब तक प्रगति नहीं कर सकता जब तक उसकी महिलाएं स्वतंत्र शिक्षित और आत्मनिर्भर ना हो* इन्हीं विचारों के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।











