संगठन , 1 अप्रैल 2025 नुमाइश अधिसूचना के पास उत्सव होटल में स्थित ब्राह्मण समाज महासभा द्वारा एक विचार बिशप का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के प्रतिष्ठित लोगों, धार्मिक नेताओं और संगठनों के संगठनों ने भाग लिया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य 29 अप्रैल को आयोजित होने वाली परशुराम शोभा यात्रा को अत्यंत भव्य एवं विशाल स्वरूप प्रदान करना था।
पीएचडी के प्रमुख बिंदु
1. भव्य समारोह की तैयारियाँ
– संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पंडित अरुण येशु ने मीडिया को बताया कि इस साल के पिछले वर्षों की तुलना में अधिक विस्तृत होगी। यात्रा में महामंडलेश्वर हरिहरानंद सरस्वती महाराज और महामंडलेश्वर अन्नपूर्णा भारती जैसे प्रमुख संतों की सलामी रहेगी।
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– भगवान परशुराम के स्वरूप में पिलुआ महावीर के महंत महराज दास महाराज रथ पर विराजमान हैं, जिससे यात्रा का आध्यात्मिक महत्व और महत्व बना रहता है।
2. मासिक बैठक एवं समाज सेवा
-बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब प्रत्येक माह इसी प्रकार का पाठ्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
– साथ ही, प्रति माह 70 वर्ष से अधिक आयु के एक वरिष्ठ नागरिक को “सीनियर सिटीजन के रूप में सम्मानित किया गया, वर्ष जो समाज के प्रति उनका योगदान है।”
3. संगठन की सक्रिय भूमिका
– संरक्षक मंडल के सदस्य प्रेम शंकर शर्मा, डॉ. बैठक में विनोद शर्मा, धीरेन्द्र कोरिया, श्याम चौधरी, राजेश कुमार बाजपेयी, कमल किशोर बाजपेयी और रेजिडेंट त्रिपोली ने सभी पार्टियों का स्वागत किया।
– जिला अध्यक्ष एस के दीक्षित, एफएक्यू शिवम जॉय, महिला युवा मोर्चा अध्यक्ष पूनम तिवारी और कार्यक्रम के संयोजक पंकज चौधरी समेत कई अन्य समर्थकों ने यात्रा की अंतिम यात्रा पर चर्चा की।
आध्यात्म का समापन एवं आगामी योजनाएं
– विचार-विमर्श के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने हिंदी नववर्ष की शुभकामनाएं साझा कीं और दीपोत्सव का आयोजन किया गया।
– इसके बाद जय श्री राम के उद्घोष के साथ सभी ने नुमाइश विज्ञप्ति तक पद संचलन (पैडल मार्च) किया, जिससे एक सामूहिक उत्साह का माहौल बना।
प्रमुख लोग
छात्र संगठन के सक्रिय सदस्यों में अनिल चौधरी, अवनीश अख्तर, विवेक कश्यप, देवकीनंदन त्रिपाठी, के के त्रिया, गोविंद माधव पाठक, आकाश मिश्रा, राजेश कश्यप, आकाश कश्यप, लवपेंडेव, अमित तिवारी, रोहित तिवारी, विवेक कश्यप और आशीष शुक्ला आदि शामिल रहे।
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यह केवल परशुराम शोभा यात्रा को सफल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था, बल्कि समाज के बीच एकता और सामूहिक उत्साह को भी दर्शाता है। 29 अप्रैल को यह निश्चित रूप से आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से एक अवतरणीय कार्यक्रम यात्रा साबित होगी।











