अब्दुल्ला अख़्तर
गुरसहायगंज: मोहल्ला मुजाहिद नगर स्थित मदरसा मिसबाहुल उलूम में उस समय रूहानी और ख़ुशी का माहौल देखने को मिला, जब मदरसे के होनहार छात्र मोहम्मद अनस ने पवित्र क़ुरआन को ज़बानी याद करने (हिफ़्ज़) की सआदत हासिल की। इस मुबारक मौक़े पर एक विशेष दुआ की महफ़िल का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के प्रतिष्ठित उलेमा, गणमान्य व्यक्तियों और सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोगों ने शिरकत की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मदरसे के मोहतमिम मौलाना क़मरुज़ज़मा क़ासमी ने हाफ़िज़-ए-क़ुरआन की अज़मत व फ़ज़ीलत पर विस्तार से रौशनी डाली। उन्होंने कहा कि क़ुरआन को सीने में महफ़ूज़ करने वाला शख्स न केवल अपने लिए, बल्कि अपने वालिदैन और खानदान के लिए भी जन्नत का रास्ता आसान करता है। एक हाफ़िज़ समाज के लिए मशाल-ए-राह होता है।
मशहूर शायर मुफ़्ती तारिक़ जमील कन्नौजी ने अपनी विशिष्ट शैली में हाफ़िज़-ए-क़ुरआन की शान में बेहतरीन अशआर पेश किए, जिससे महफ़िल में जोश भर गया। उन्होंने पढ़ा:
“हाफ़िज़-ए-क़ुरआन ताज को पहने जब घूमेंगे महशर में,
अश-अश करते होंगे फ़रिश्ते हूरें होंगी चक्कर में।”
इस ऐतिहासिक घड़ी में मोहम्मद अनस के उस्ताद और उनके वालिद मौलाना वसीनूर भावुक नज़र आए। कार्यक्रम में मदरसे के उस्ताज़ मौलाना अली हसन क़ासमी, मौलाना वहाजुद्दीन क़ासमी, मौलाना मुज़क्किर, क़ारी उवैस जामई और क़ारी एहतेशाम ने नए हाफ़िज़ को दुआओं से नवाज़ा।
हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन की तकमील (पूरा होने) की खुशी में मदरसा मिसबाहुल उलूम में ज़ियाफ़त (खाने) का शानदार इंतज़ाम किया गया, जिसमें आए हुए सभी मेहमानों ने शिरकत की। कार्यक्रम के समापन के बाद हाफ़िज़ मोहम्मद अनस को बधाई देने वालों का तांता लग गया। परिवार के सदस्यों के साथ-साथ पूर्व सभासद अय्यूब सिद्दीकी सहित सैकड़ों क्षेत्रीय लोगों ने फूल-मालाएं पहनाकर और दुआएं देकर अनस के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
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अश-अश करेंगे फ़रिश्ते…” मुफ़्ती तारिक़ जमील के अशआर के बीच मुकम्मल हुआ अनस का हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन










