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May 31, 2026 7:58 am

69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने डिप्टी सीएम केशव मौर्य के आवास के बाहर किया प्रदर्शन 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण घोटाले को लेकर सोमवार को अभ्यर्थियों के हुजूम ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास के बाहर प्रदर्शन किया।अभ्यर्थियों ने जोरदार नारेबाजी की।सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई न होने से अभ्यर्थी नाराज हैं।अभ्यर्थी केशव चाचा न्याय करो का नारा लगाकर धरने पर बैठ गए।पुलिस ने सभी को बस से धरनास्थल इको गार्डेन भेज दिया। 

 

अभ्यर्थियों का कहना है कि हाई कोर्ट का जो फैसला आया था,सरकार ने उसे जानबूझ कर लटका दिया।इससे मामला अब सुप्रीम कोर्ट में चला गया। सरकार के पास पर्याप्त समय था,वह हाई कोर्ट डबल बेंच के फैसले का पालन करके सबके साथ न्याय कर सकती थी। अभ्यर्थियों ने मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की और साथ ही दोषियों पर कार्रवाई की मांग भी की है। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने आरक्षण नियमों की अनदेखी कर भर्ती होने का आरोप लगाया है।

 

धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल और धनंजय गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2018 में यह भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी।जब इसका परिणाम आया तो इसमें व्यापक स्तर पर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय किया गया।उन्हें नौकरी देने से वंचित कर दिया गया। उन्होंने कि एक लंबे आंदोलन और न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद बीते 13 अगस्त 2024 को लखनऊ हाई कोर्ट के डबल बेंच ने हम आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के हित में फैसला सुनाया। नियमों का पालन करते हुए अभ्यर्थियों को नियुक्ति दिए जाने का आदेश दिया,लेकिन सरकार इस प्रकरण में हीलाहवाली करती रही।

 

अमरेंद्र पटेल ने कहा कि उन्होंने इससे पहले भी कई बार केशव प्रसाद मौर्य के आवास का घेराव किया था।तब उन्होंने त्वरित न्याय किए जाने की बात कही थी।हम अभ्यर्थियों से मुलाकात भी की थी,लेकिन उनकी बात को भी अधिकारियों ने नहीं माना।पटेल ने कहा कि अब यह मामला माननीय सुप्रीम कोर्ट में चला गया,हम पिछड़े दलित गरीब अभ्यर्थी अधिकारियों और सरकार के इस रवैया से काफी हताश और परेशान हैं,जो काम कुछ दिनों में हो सकता था,उसे इतना लंबा जानबूझकर टाल दिया गया है।केशव का त्वरित न्याय की टिप्पणी, खाने के दांत अलग और दिखाने के दांत अलग साबित हुआ। त्वरित न्याय की कोई सीमा होती है यह नहीं की महीनों मामला लटक रहे।

 

बता दें कि यह मामला कई सालों से कानूनी जांच के दायरे में है, 69000 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण नियमों को लागू करने से जुड़ा है।इस मामले की पहली सुनवाई सितंबर 2024 में हुई थी।तब से अभ्यर्थियों का दावा है कि बिना किसी ठोस समाधान के मामले को बार-बार टाला जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 4 फरवरी को होनी है

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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