इटावा, इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मुहर्रम की पहली तारीख को इटावा शहर में संजेरी का ऐतिहासिक जुलूस भव्यता और गहन शोक-संवेदना के साथ निकाला गया। कर्बला के मैदान में प्यासे-भूखे शहीद हुए हज़रत इमाम हुसैन और उनके साथियों की याद में निकले इस जुलूस में मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ अन्य समुदायों के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
जुलूस का मार्ग और आयोजन 
मुकाम साबित गंज से सुबह करीब 10 बजे शुरू हुआ यह जुलूस शहर के प्रमुख चौराहों — घंटाघर, कचहरी चौराहा, सर्राफा बाजार, और नई सड़क — से होता हुआ दोपहर बाद वापस अपने प्रारंभिक स्थल पर पहुँचा। पूरे रास्ते भक्तिमय वातावरण रहा, जहाँ श्रद्धालुओं ने “हाय हुसैन, वाय हुसैन” के नारे लगाते हुए सीना-कोबी और नौहा-मातम किया। कई जगहों पर ताजियों और झांकियों को सजाया गया था, जो कर्बला के साक्ष्य को जीवंत कर रहे थे।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
शहर में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस ने पूरी तैयारी की थी। भारी पुलिस बल के साथ-साथ पैरामिलिट्री फोर्स की भी तैनाती की गई थी।
· शहर कोतवाल यशवंत सिंह स्वयं पूरे जुलूस की निगरानी करते रहे।
· उपनिरीक्षक दयानंद पटेल, अरुण कुमार तथा कांस्टेबल अमित कुमार, अभिषेक यादव, विकास शाक्य और बिलाल अहमद सहित 50 से अधिक जवान यातायात प्रबंधन और सुरक्षा में जुटे रहे।
· सीसीटीवी कैमरों से भी पूरे मार्ग पर नजर रखी गई तथा मोबाइल पेट्रोलिंग टीमें तैनात रहीं।
शांतिपूर्ण संपन्नता और भाईचारे का संदेश
जुलूस शाम करीब 4 बजे पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। इस दौरान कहीं से भी किसी प्रकार के विवाद या गड़बड़ी की कोई खबर नहीं है। प्रशासन ने सभी नागरिकों से सौहार्द, आपसी भाईचारे और धार्मिक सहिष्णुता बनाए रखने की अपील की है।
लोगों ने कहा
“इमाम हुसैन ने सत्य और न्याय के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। उनका यह बलिदान हर युग के लिए प्रेरणा है। आज का यह जुलूस हमें एकता, त्याग और इंसानियत का पाठ पढ़ाता है।”
कल भी निकलेगा जुलूस
प्रशासन ने बताया कि मुहर्रम की 9 और 10 तारीख (आशूरा) पर अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे और भारी जुलूस निकलने की संभावना को देखते हुए ट्रैफिक डायवर्जन योजना जारी रहेगी। इस बीच शहर में एहतियातन धारा 144 भी लागू रखी गई है।
गौरतलब है कि मुहर्रम का महीना इस्लाम धर्म में बेहद महत्वपूर्ण है, और इटावा जैसे शहरों में सदियों से यह परंपरा आस्था और आपसी सम्मान के साथ निभाई जा रही है।











