अब्दुल्ला अख़्तर छिबरामऊ
गिरफ्तारी के डर से महिला ने किया आत्मदाह का ड्रामा, पुलिस टीम के साथ की अभद्रता
छिबरामऊ। कोतवाली क्षेत्र की कांशीराम कॉलोनी में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक आपराधिक छवि की महिला ने पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए ‘सुसाइड पॉलिटिक्स’ का सहारा लिया। हालांकि, मौके पर मौजूद कस्बा इंचार्ज मनोज चौधरी और उप-निरीक्षक सूरज किशोर की तत्परता ने महिला की जान बचाते हुए कानून का इकबाल बुलंद किया।
मिली जानकारी के अनुसार, अमन नामक एक युवक ने महिला और उसकी दो पुत्रियों पर बंधक बनाकर मारपीट करने और मोबाइल लूटने का गंभीर आरोप लगाया था। जब दरोगा मनोज चौधरी और उनकी टीम सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मारपीट की पुष्टि होने के बाद आरोपी महिला को गिरफ्तार करने पहुंची, तो उसने खुद को कमरे में बंद कर लिया।
दरोगा की सक्रियता से बची जान
पुलिस को दबाव में लेने के लिए महिला ने फांसी लगाने का प्रयास किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दरोगा मनोज चौधरी ने बिना वक्त गंवाए दरवाजा तोड़ा और महिला को फंदे से सुरक्षित नीचे उतारा। पुलिस का कहना है कि उनकी प्राथमिकता ‘जान बचाना और कानून व्यवस्था’ को सर्वोपरि रखना था।
बचने के लिए रची गई साजिश
दरोगा मनोज चौधरी ने स्पष्ट किया कि उक्त महिला का लंबा आपराधिक इतिहास रहा है।
• महिला पर पहले से ही 5 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
• एक वर्ष पूर्व वह कच्ची शराब की तस्करी के आरोप में जेल जा चुकी है।
• इससे पूर्व भी वह तत्कालीन कोतवाली प्रभारी पर झूठे आरोप लगाकर जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर चुकी है।
पुलिस के साथ की धक्का-मुक्की
बचाए जाने के बाद भी महिला का व्यवहार उग्र बना रहा। उसने पुलिस टीम के साथ धक्का-मुक्की और गाली-गलौज की। पुलिस प्रशासन का मानना है कि इस तरह के ‘हाई-वोल्टेज ड्रामे’ पुलिस के मनोबल को गिराने की एक सोची-समझी साजिश है। फिलहाल पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और सख्त कानूनी रुख अपनाने की तैयारी में है।
कोतवाली प्रभारी कपिल दूबे ने कहा
आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों द्वारा कानून को ढाल बनाकर किया जाने वाला यह प्रयास पुलिस के मनोबल पर चोट है। दरोगा और उनकी टीम ने विपरीत परिस्थितियों में भी संयम और साहस का परिचय दिया है।











