अब्दुल्ला अख़्तर
नगला दुर्गा में श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर भक्त प्रहलाद व परशुराम प्रसंग का वर्णन
छिबरामऊ : बाबा वीरेश्वर महाराज मठिया वाले मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन गुरुवार को भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास आचार्य सिंधु कुमार दुबे ने भक्त और भगवान के अनूठे संबंध पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
भक्ति और गो-सेवा का महत्व
आचार्य ने कहा कि भक्ति में वह शक्ति है कि भगवान को अपने भक्त के लिए नंगे पैर आना पड़ता है। उन्होंने हनुमान जी को भक्ति शिरोमणि बताते हुए कहा कि ऐसी अनन्य भक्ति से ही जीवन का उद्धार संभव है। कथा के दौरान उन्होंने गो-सेवा पर विशेष जोर देते हुए कहा गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। गाय पर अत्याचार असहनीय है और उसे प्रताड़ित करने वाला नरक गामी होता है। यदि आप स्वयं गाय नहीं पाल सकते, तो जहां गो-पालन हो रहा है, वहां सहयोग कर पुण्य के भागी बनें।
कथा में आचार्य ने भक्त प्रहलाद की अटूट श्रद्धा और भगवान परशुराम के पराक्रम का विस्तार से वर्णन किया। इससे पूर्व परीक्षित रामप्रकाश दुबे व शशी दुबे ने व्यास गद्दी का पूजन कर कथा का शुभारंभ कराया। मुख्य अतिथि लोकेंद्र सिंह यादव ने आचार्य को खाटू श्याम का चित्र व पटका भेंट कर उनका सम्मान किया।
कथा के विश्राम पर भव्य आरती की गई और फल प्रसाद का वितरण हुआ। इस अवसर पर मुख्य रूप से पुरुष वर्ग से राजेंद्र दुबे, बबलू दुबे, देवकीनंदन दुबे, प्रत्यूष द्विवेदी, जयप्रकाश दुबे, बंटी दुबे, वेदप्रकाश दुबे, कमलाकांत दुबे, घनश्याम दुबे, सत्यप्रकाश दुबे, रामबाबू, सिपाही लाल, महेश कमल, गोपीचंद, सनी दुबे और महिला वर्ग से आकांक्षा दुबे, मीनाक्षी दुबे, नीलम दुबे, मधु दुबे, पूनम दुबे, प्रतिभा दुबे, जया दुबे, राधिका दुबे, रागनी दुबे, मंजू दुबे, रानी दुबे, गुड्डी दुबे, रीना दुबे, अनीता दुबे एवं पूजा दुबे।
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