इटावा। सातवें इमाम हज़रत मूसा ए काज़िम अ.स. की शहादत और हज़रत अबू तालिब अ.स. की वफात पर सफीर हैदर की ओर से पक्की सराये स्थित बड़े इमामबाड़े में मजलिस का आयोजन किया गया।
मजलिस में तक़रीर करते हुए मौलाना अनवारुल हसन ज़ैदी इमामे जुमा इटावा ने कहा वतन से मोहब्बत करना हर इंसान का फर्ज है, हिंदुस्तान सभी धर्मों का संगम है हमे वतन से मोहब्बत के साथ कानून का भी पालन करना चाहिए। अल्लाह मेरे मुल्क हिंदुस्तान को दुश्मनों से महफूज रखे। श्री जैदी ने कहा मौलाए कायनात मौला अली के पिता हज़रत अबुतालिब का इस्लाम पर बहुत बड़ा एहसान है। जनाबे अबुतालिब ने रसूल अल्लाह की परवरिश कर उनकी हिफाजत भी की है। सातवें इमाम मूसा ए काज़िम ने फरमाया है कि बेटा कभी बाप को नाम से न पुकारे बल्कि अदब से नाम ले। इंसान को चाहिए वक्त की कद्र करे और अच्छे दोस्त बनाएं, दीने खुदा को समझो, जो दुनिया से मोहबब्त करता है उसके दिल से ख़ौफ़े खुदा निकल जाता है। इंसान गुस्से को पी जाए। सातवें इमाम ने चार जालिम बादशाहों का ज़माना देखा। सातवें इमाम ने कैदखाने में भी अल्लाह की इबादत की। इमाम को जहर देकर शहीद किया गया।
मजलिस का शुभारंभ सफीर हैदर, ज़हूर नक़वी, अश्शू रिज़वी ने सोजख्वानी से किया। अख्तर अब्बास रिज़वी, अली अब्बास सलमान ने कलाम पेश किए। मजलिस में अल्हाज़ कमर अब्बास नकवी करबलाई, हाजी अरशद मरगूब, राहत अक़ील, शावेज़ नक़वी, मो. मियां, मो. अब्बास, हसन अब्बास, मुशीर हैदर, समर अब्बास नक़वी, तहसीन रज़ा, अयाज हुसैन, शादाब हसन, तस्वीर हैदर, मो. हुसैन राहिल, दबीरुल हसन, शारिक सगीर शानू, सोनू नक़वी, परवेज़ हसनैन, शहजादे, मो. जुनैद, मो. जावेद, शाहिद, जुबैर, मिन्हाज, शब्बर अक़ील, राशिद, राजा, आले रज़ा नक़वी, मो. अहमद, अमीर हैदर, अदनान, राहत हुसैन रिज़वी, राहिल सगीर, नजमुल हसन, शाजू, अत्तू, आबिद रज़ा सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।
फोटो- सोजख्वानी करते सफीर हैदर, ज़हूर नक़वी, अश्शू रिज़वी।











