लखनऊ अग्निकांड के बाद हड़कंप, सामने आई चौंकाने वाली तस्वीर
लखनऊ के कोचिंग सेंटर में आग लगने से 15 छात्रों की मौत के बाद इटावा प्रशासन ने जांच तेज कर दी। इस जांच ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है – आखिर इटावा में इतने सारे कोचिंग सेंटर कैसे चल रहे थे, जबकि विभाग को पहले से ही सही स्थिति का पता था?
सिर्फ 12 पंजीकृत, फिर 300 से ज्यादा कैसे चल रहे थे?
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में इटावा में मात्र 12 कोचिंग सेंटर ही पंजीकृत हैं, जबकि एक रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 300 से अधिक कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे थे। यानी सैकड़ों सेंटर बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे थे। यह स्थिति तब है, जब अग्निशमन विभाग के अनुसार जनपद में अभी तक केवल सात कोचिंग सेंटर ने ही एनओसी प्राप्त की है।
बड़ा सवाल: क्या विभाग जानबूझकर अनजान था?
सवाल उठता है कि क्या संबंधित विभाग को इस अवैध संचालन की जानकारी नहीं थी?
· अगर विभाग को पता था तो इतने लंबे समय तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
· क्या यह मिलीभगत थी या फिर जानबूझकर की गई लापरवाही?
· आखिर इस खेल में कौन-कौन शामिल था? क्या सिर्फ रजिस्ट्रेशन करने वाला बाबू ही दोषी है, या कोई और भी है?
क्या 45 सेंटरों पर नोटिस सही हैं या कोई और खेल?
एक तरफ पंजीकृत सेंटरों की संख्या 12 है, तो दूसरी तरफ अग्निशमन विभाग ने 22 कोचिंग सेंटरों और लाइब्रेरी का निरीक्षण किया। इनमें से 2 को बंद करने की चेतावनी दी गई और 20 को सुधार के निर्देश दिए गए। सवाल यह है कि जब पंजीकृत सिर्फ 12 हैं, तो बाकी सेंटरों पर नोटिस क्यों? क्या विभाग को पहले से पता था कि 40 से ज्यादा सेंटर अवैध हैं?
क्या इंतजार था लखनऊ की त्रासदी का?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विभाग इस त्रासदी का इंतजार कर रहा था?
· क्या लखनऊ की घटना से पहले कार्रवाई नहीं हो सकती थी?
· क्या बच्चों की सुरक्षा इतनी महत्वपूर्ण नहीं थी?
· आखिर संबंधित विभाग बच्चों की सुरक्षा के प्रति कब सजग होगा?
निष्कर्ष: क्या सिर्फ कार्रवाई काफी है?
इटावा प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और अधिकारियों का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा के साथ किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ दिखावा है? क्या उन सभी अवैध सेंटरों पर कार्रवाई होगी जो सालों से चल रहे थे? क्या इस पूरे खेल के मास्टरमाइंड को सामने लाया जाएगा? यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।











