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June 29, 2026 1:35 am

राम भरोसे ‘सौ शैया अस्पताल’, तीमारदारों से बदसलूकी और बदइंतजामी का अड्डा बना चिकित्सालय!

अब्दुल्ला अख़्तर
• स्टाफ की मनमर्जी और ‘हील-हवाली’ से दांव पर लगी मरीजों की जान
• एक्स-रे फिल्म के लाले: मोबाइल में फोटो खींचकर थमा रहे रिपोर्ट, गरीब जनता बेहाल
छिबरामऊ, कन्नौज।
उत्तर प्रदेश सरकार भले ही सूबे में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन छिबरामऊ स्थित सौ शैया संयुक्त चिकित्सालय में इन दावों की धज्जियां खुलेआम उड़ाई जा रही हैं। स्थानीय अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही और स्टाफ की तानाशाही के चलते यह अस्पताल अब मरीजों के इलाज का नहीं, बल्कि उनकी प्रताड़ना का केंद्र बन चुका है। आलम यह है कि पूरे अस्पताल का प्रशासन पूरी तरह से ‘राम भरोसे’ चल रहा है।
अस्पताल में तैनात स्टाफ अपनी मनमर्जी पर उतारू है और तीमारदारों व मरीजों के साथ बेहद अभद्र व्यवहार किया जा रहा है। लापरवाही का एक खौफनाक मामला हाल ही में सामने आया, जब अस्पताल में भर्ती एक मरीज के ‘विको’ से अचानक तेजी से खून बहने लगा। घबराए परिजनों ने तुरंत ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ से गुहार लगाई। लेकिन संवेदनहीनता की हद देखिए—स्टाफ ने ‘हील-हवाली’ और टालमटोल करते हुए काफी समय बर्बाद कर दिया, जिससे मरीज की जान पर बन आई।
इस गंभीर लापरवाही की शिकायत जब मुख्य चिकित्सा अधीक्षक से की गई, तो उन्होंने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। दोषी स्टाफ के खिलाफ कोई कार्रवाई न होना यह साफ करता है कि अस्पताल में लापरवाही करने वालों को ऊंचे पदों पर बैठे जिम्मेदारों का खुला संरक्षण प्राप्त है।
अस्पताल के अंदर चल रही धांधली यहीं खत्म नहीं होती। नाम न छापने की शर्त पर एक मरीज ने अस्पताल के काले कारनामों का पर्दाफाश करते हुए बताया कि चिकित्सालय में एक्स-रे तो किए जा रहे हैं, लेकिन मरीजों को उसकी फिल्म उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
एक्स-रे करने के बाद मरीजों से कहा जाता है कि वे अपने मोबाइल से कंप्यूटर स्क्रीन की फोटो खींच लें। अब सवाल यह उठता है कि जिन गरीब मरीजों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं, वे अपनी रिपोर्ट कहां से लाएं? और मोबाइल की इस धुंधली फोटो के सहारे डॉक्टर सटीक इलाज कैसे कर सकते हैं? क्या एक्स-रे फिल्म के बजट में भी कोई बड़ा गोलमाल चल रहा है?
जब व्यवस्था का मुखिया ही अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ ले, तो मातहतों से क्या उम्मीद की जाए? स्थानीय लोगों और सूत्रों के मुताबिक, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक खुद नियमों को ताक पर रखकर नौकरी कर रहे हैं। साहब अपनी मर्जी के मालिक हैं; वे कन्नौज से दोपहर 12:00 बजे तक आराम से अस्पताल पहुंचते हैं और मात्र 3 घंटे की ‘हाजिरी’ बजाकर दोपहर 3:00 बजे वापस रफूचक्कर हो जाते हैं।
जब मुख्य जिम्मेदार ही अस्पताल को मात्र 3 घंटे दे रहा हो, तो बाकी समय मरीजों की सुध लेने वाला कौन है? यही कारण है कि डॉक्टरों और स्टाफ के हौसले बुलंद हैं और वे जनता को कीड़े-मकौड़े समझ रहे हैं।
छिबरामऊ की जनता अब इस बदइंतजामी से आजिज आ चुकी है। स्थानीय नागरिकों और तीमारदारों ने जिलाधिकारी कन्नौज और सूबे के स्वास्थ्य मंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। देखना यह होगा कि इस ‘राम भरोसे’ चल रहे अस्पताल के लापरवाह तंत्र पर प्रशासन का हंटर चलता है या फिर मरीजों को यूं ही अपने हाल पर तड़पने के लिए छोड़ दिया जाएगा।

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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