अब्दुल्लाह अख़्तर
छिबरामऊ (कन्नौज): देश के कई हिस्सों की तरह हमारे क्षेत्र में भी पारा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। दोपहर के समय आसमान से बरसती आग और थपेड़े मारती गर्म हवाओं (लू) ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए निज़ामी क्लिनिक के संचालक डॉक्टर अज़ीम ने जनता से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
डॉक्टर अज़ीम ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यह मौसम केवल असुविधाजनक नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। थोड़ी सी भी लापरवाही हीट स्ट्रोक (Sunstroke) का कारण बन सकती है, जो जानलेवा भी साबित हो सकती है।
डॉक्टर अज़ीम ने आम जनता को इस मौसम में सुरक्षित रहने के लिए व्यावहारिक और बेहद ज़रूरी उपाय अपनाने की सलाह दी है उन्होंने कहा प्यास न लगने पर भी लगातार पानी पीते रहें। शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने के लिए नींबू पानी, ओआरएस (ORS) का घोल, छाछ, नारियल पानी और आम का पन्ना लें, दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच, जब धूप सबसे तेज़ होती है, बहुत ज़रूरी न होने पर घर से बाहर न निकलें, बाहर निकलते समय हमेशा हल्के रंग के, ढीले-ढाले और सूती (कॉटन) कपड़े पहनें। सिर को ढकने के लिए टोपी, छतरी या सूती गमछे/दुपट्टे का इस्तेमाल करें और आंखों की सुरक्षा के लिए धूप का चश्मा (सनग्लासेस) पहनें, कभी भी खाली पेट धूप में न निकलें। घर से हमेशा कुछ खाकर और पानी की बोतल साथ लेकर ही बाहर जाएं, इस मौसम में खाना बहुत जल्दी खराब होता है। इसलिए बासी या खुला हुआ भोजन खाने से बचें, क्योंकि इससे फूड पॉइजनिंग और डायरिया का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टर अज़ीम ने सलाह दी है कि यदि आपके आसपास किसी को अत्यधिक सिरदर्द, तेज़ बुखार, चक्कर आना, उल्टी होना, या त्वचा का एकदम लाल और सूखा होना जैसे लक्षण दिखें, तो यह लू लगने का संकेत है
पीड़ित व्यक्ति को तुरंत किसी ठंडी या छायादार जगह पर ले जाएं, उसके कपड़े ढीले करें और शरीर पर ठंडे पानी की पट्टियां रखें, होश में होने पर उसे धीरे-धीरे पानी या ओआरएस का घोल पिलाएं, स्थिति में सुधार न होने पर बिना देर किए नजदीकी अस्पताल या डॉक्टर से संपर्क करें।
स्वास्थ्य संबंधी सुझावों के साथ-साथ डॉक्टर अज़ीम ने क्षेत्र में हो रही भारी बिजली कटौती पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की है।
उन्होंने कहा एक तरफ आसमान से आग बरस रही है, तो दूसरी तरफ घंटों की पावर कट (बिजली कटौती) ने लोगों की रात की नींद और दिन का चैन छीन लिया है। बिना पंखे और कूलर के घरों के भीतर का तापमान थर्मल इनवर्जन (अत्यधिक गर्मी का जमा होना) के कारण भट्टी जैसा हो जाता है। ऐसे में बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार मरीजों (जैसे हाई ब्लड प्रेशर और दिल के मरीज) के लिए शरीर के तापमान को नियंत्रित रखना नामुमकिन हो जाता है, जिससे उनकी जान पर संकट मंडरा रहा है।
डॉक्टर अज़ीम ने प्रशासन और बिजली विभाग से पुरज़ोर अपील की है कि इस आपातकालीन जैसे मौसम में कम से कम कटौती की जाए और अस्पतालों व रिहायशी इलाकों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि लोग इस जानलेवा गर्मी से बच सकें।
निज़ामी क्लिनिक की ओर से डॉक्टर अज़ीम ने सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे स्वयं भी सुरक्षित रहें और अपने आस-पास के लोगों, बच्चों व बेजुबान जानवरों के लिए भी पीने के पानी का इंतजाम करें। सतर्कता ही इस मौसम में सबसे बड़ा बचाव है।
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डॉक्टर अज़ीम ने दिए लू से बचाव के तरीके, लगातार बिजली कटौती पर जताई गहरी चिंता










