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June 13, 2026 10:29 am

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विद्युत वितरण कंपनियों के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन को 10 केंद्रीय श्रम संघों का समर्थन:

इटावा 19 मार्च 2025 विद्युत वितरण कंपनियों के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन को 10 केंद्रीय श्रम संघों का समर्थन: लखनऊ में 09 अप्रैल को बड़ी रैली की तैयारी, जनपदों में बिजली पंचायत शुरू: निर्णायक संघर्ष हेतु सेंट्रल कंट्रोल रूम गठित: प्रांतव्यापी विरोध प्रदर्शन जारी

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने लखनऊ में 09 अप्रैल को होने वाली विशाल रैली की तैयारी में प्रांतव्यापी दौरा प्रारंभ कर दिया है। इसके साथ ही जनपदों में बिजली पंचायत का आयोजन भी शुरू हो गया है। संघर्ष समिति ने निर्णायक संघर्ष की तैयारी और 24 घंटे मॉनिटरिंग के लिए लखनऊ में सेंट्रल कंट्रोल रूम का गठन किया है।

 

देश के 10 प्रमुख राष्ट्रीय श्रम संघों ने बिजली वितरण के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन का खुलकर समर्थन किया है। यह समर्थन कल दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय श्रम संघों के सम्मेलन में पारित प्रस्ताव में दर्ज किया गया। आज लगातार 112वें दिन बिजली कर्मचारियों का प्रांतव्यापी विरोध प्रदर्शन जारी है।

राष्ट्रीय श्रम संघों का समर्थन

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में आयोजित 10 श्रम संघों के राष्ट्रीय सम्मेलन में पारित प्रस्ताव में विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन का उल्लेख करते हुए इसका समर्थन किया गया है। प्रस्ताव में कहा गया है, “डिस्कॉम को निजी खिलाड़ियों को सौंपे जाने के खिलाफ बिजली कर्मचारी लगातार आंदोलन कर रहे हैं। राष्ट्रीय हित में रेलवे, कोयला खदान, बिजली, पेट्रोलियम, बैंक, बीमा आदि के निजीकरण अभियान पर तत्काल रोक लगानी चाहिए।”

 

इस प्रस्ताव का समर्थन करने वाले प्रमुख श्रम संघों में इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ और यूटीयूसी शामिल हैं।

जनपदों में बिजली पंचायत

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आज रामपुर और मुरादाबाद में बिजली पंचायत का आयोजन किया। मुरादाबाद की बिजली पंचायत में बिजनौर, संभल, अमरोहा, नजीबाबाद, चंदौसी और मुरादाबाद के बिजली कर्मचारी तथा आम उपभोक्ता शामिल हुए।

निजीकरण के खिलाफ आरोप

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि बिजली के निजीकरण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि निजीकरण के बाद आम उपभोक्ताओं और किसानों के लिए बिजली की दरों में बेतहाशा वृद्धि की जाएगी। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि मुंबई में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरें 17.71 रुपए प्रति यूनिट तक हैं, जबकि उत्तर प्रदेश में यह दर 6.50 रुपए प्रति यूनिट है।

 

संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया कि निजीकरण के पहले बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों को हटाया जा रहा है और नियमित बिजली कर्मचारियों की रियायती बिजली की सुविधा जबरन समाप्त की जा रही है। यह सब इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 का खुला उल्लंघन है।

 

09 अप्रैल को लखनऊ में बड़ी रैली

संघर्ष समिति ने बताया कि 09 अप्रैल को लखनऊ में बिजली कर्मचारियों की अब तक की सबसे बड़ी रैली आयोजित की जाएगी। इस रैली में बिजली के निजीकरण के विरोध में संघर्ष का शंखनाद किया जाएगा।

 

प्रांतव्यापी विरोध प्रदर्शन

आज वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, हरदुआगंज, पारीछा, ओबरा, पिपरी और अनपरा में विरोध सभाएं आयोजित की गईं।

 

संपर्क

विवेक कुमार सिंह

संयोजक, संयुक्त संघर्ष समिति, इटावा

समाप्त

नोट यह प्रेस विज्ञप्ति विद्युत कर्मचारियों के आंदोलन और उनकी मांगों को लेकर जनता और मीडिया को जागरूक करने के उद्देश्य से जारी की गई है।

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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