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November 3, 2026 3:10 am

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जसवंतनगर पुलिस ने शांति भंग के आरोप में 16 लोगों को किया गिरफ्तार, न्यायालय में किया पेश इटावा। थाना जसवंतनगर पुलिस ने क्षेत्र में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई करते हुए अलग-अलग गांवों और क्षेत्रों के 16 लोगों को शांति भंग की आशंका में गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, 2 नवंबर 2026 को गिरफ्तार किए गए लोगों में ग्राम जलपोखर के जयवीर सिंह, अवनीश कुमार, विपिन कुमार और सत्यवीर सिंह शामिल हैं। इसके अलावा पीपरीपुरा निवासी कौशल कुमार, गोबेपुरा निवासी अजीत, डूडहा निवासी अमित, नगला विधि निलोई निवासी विनोद यादव और ओमवीर यादव तथा नगला नरिया निवासी प्रदीप कुमार उर्फ सिंधी को गिरफ्तार किया गया। वहीं, आगरा जनपद के जैतपुरा क्षेत्र के खटिकान मोहल्ला निवासी राजाराम, सूरज, बबलू, मनी और बारिश तथा बाह थाना क्षेत्र के बिजौली निवासी रामराज को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सभी 16 लोगों के खिलाफ धारा 170/126/135 बीएनएसएस के तहत निरोधात्मक कार्रवाई करते हुए उपजिला मजिस्ट्रेट न्यायालय जसवंतनगर में पेशी के लिए रवाना किया गया। थाना प्रभारी कमल भाटी ने बताया कि क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार से शांति भंग होने की आशंका पर पुलिस द्वारा सतर्कता बरतते हुए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस लगातार निगरानी कर रही है।

किसी भी महिला को बच्चा पैदा करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते,एससी का बड़ा फैसला

नई दिल्ली।सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अहम फैसला सुनाया है।सुप्रीम कोर्ट ने 30 सप्ताह की गर्भावस्था में गर्भपात की अनुमति दी है।एससी ने साफ तौर पर कहा कि कोर्ट किसी भी महिला खासकर नाबालिग बच्ची को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।एससी ने कहा कि लड़की का मानसिक पहलू ही बच्चे को जन्म नहीं देना चाहता और अगर मां के हित का ध्यान रखना है तो उसकी प्रजनन स्वायत्तता पर पूरा जोर दिया जाना चाहिए।

एससी ने माना कि गर्भावस्था जारी रखना लड़की के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से गंभीर आघात का कारण बन सकता है।बता दें कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला गर्भवती हुई एक नाबालिग लड़की से जुड़े मामले में सामने आया है।

 

जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच ने एक लड़की की 30 सप्ताह की गर्भावस्था में गर्भपात की अनुमति दे दी,जो नाबालिग होने पर गर्भवती हो गई थी।बेंच ने कहा कि जिस बात पर विचार करने की जरूरत है, वह है नाबालिग बच्चे का गर्भ जारी रखने का अधिकार,जो पहली नजर में नाजायज है।वह इसलिए क्योंकि वह खुद नाबालिग है और एक रिश्ते से उत्पन्न दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति के कारण गर्भधारण का सामना कर रही है।बेंच ने साफ किया कि मुद्दा यह नहीं था कि रिश्ता सहमति से था या यौन उत्पीड़न का नतीजा था।

 

बेंच ने कहा कि बच्चे की मां बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती है और अगर मां के हित का ध्यान रखना है तो उसकी प्रजनन स्वायत्तता पर पूरा जोर दिया जाना चाहिए।बेंच ने कहा कि हम अपील करने वाले (नाबालिग के पिता) के वकील की दलीलें मान लेते हैं,हम अपील करने वाले के बच्ची को मेडिकल प्रेग्नेंसी टर्मिनेशन (गर्भ समाप्‍त) कराने का निर्देश देते हैं।

 

बेंच ने मुंबई के जेजे अस्पताल को सभी मेडिकल सुरक्षा उपायों को ध्यान में रखते हुए अपील करने वाले की नाबालिग बेटी का गर्भ समाप्‍त करने का निर्देश दिया।बेंच ने कहा कि अपील करने वाला प्रेग्नेंसी के मेडिकल टर्मिनेशन के लिए सहमति देने वाला एक औपचारिक लिखित वचन देगा।

 

सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि हो सकता है कि उसे कोई मेडिकल प्रॉब्लम न हो,डिलीवरी में कोई दिक्कत न हो,लेकिन यह मानसिक पहल है कि वह डिलीवरी नहीं करना चाहती।जस्टिस ने महाराष्ट्र सरकार के वकील से पूछा कि इससे कैसे निपटा जाए,क्या कोर्ट कह सकता है,नहीं, नहीं, अगर आप डिलीवरी नहीं करना चाहतीं,तो भी आपको बच्चे को डिलीवर करना चाहिए,क्या कोर्ट ऐसा कह सकता है।

 

इस मुद्दे पर बात करते हुए बेंच ने कहा कि फिर वे कोर्ट आना बंद कर देंगे और किसी क्लिनिक में चले जाएंगे।बेंच का इशारा असुरक्षित गर्भपात की तरफ था।बेंच ने कहा कि यह कोई कपल नहीं है,जो दूसरा या तीसरा बच्चा चाहता है,यह एक नाजायज बच्चा है और वह इसे नहीं चाहती।बेंच ने पूछा, तो किसके अधिकार पर विचार किया जाना चाहिए..यह मुद्दा है।क्या कोर्ट महिला याचिकाकर्ता को निर्देश दे सकता है,नहीं आप बच्चे को जन्म देंगी,भले ही बच्चा नाजायज हो,भले ही आप बच्चा न चाहती हों,आप बच्चे को जन्म देंगी, क्या कोर्ट ऐसा कह सकता है।

 

जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि यह कोई आसान फैसला नहीं है। पूछा कि आप बच्चे को पूरे समय तक क्यों नहीं रख सकते और फिर डिलीवरी क्यों नहीं करवा सकते।अपील करने वाले के वकील ने कहा कि मेंटल ट्रॉमा,फिजिकल ट्रॉमा है और सोशल स्टिग्मा भी है और नाबालिग लड़की अभी भी हॉस्पिटल में है और वह अपने इलाके में वापस नहीं जा सकती।बेंच को बताया गया कि लड़की बहुत कमजोर सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से है।

 

बेंच ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा,यह हमारे लिए भी मुश्किल है,लेकिन क्या करें..क्या हमें उसे बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर करना चाहिए,क्योंकि जो बच्चा पैदा होगा, वह भी आखिरकार एक जीवन होगा।बेंच ने कहा कि फिर एक और सवाल है कि अगर वह 24 सप्ताह में गर्भपात कर सकती है तो 30 सप्ताह में क्यों नहीं।बेंच ने कहा कि लड़की गर्भावस्था जारी नहीं रखना चाहती है।

 

बेंच ने कहा कि उसके लिए भी यह तय करना मुश्किल है, क्योंकि वर्तमान मामले में एक नाबालिग बच्ची एक बच्चे को जन्म दे रही है।मुख्य बात यह है कि नाबालिग लड़की एक बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती और यही कठिनाई है।

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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