इटावा। स्थानीय सैदबाड़ा स्थित शरीफ मंज़िल निवासी स्व. जमीला रिज़वी की बरसी की मजलिस राहत अक़ील शक्कन व डा. शब्बर अक़ील की ओर से पक्की सराये स्थित बड़े इमामबाड़े में आयोजित की गई।
मजलिस में तक़रीर करते हुए मौलाना मुज़फ़्फ़र हुसैन ज़ैदी मुज़फ़्फ़रनगर ने कहा कि अल्लाह और एहलेबैत को जानना काफी नही है बल्कि इनको अपने अमल से पहचानना जरूरी है। जो इंसान अल्लाह पर पुख्ता ईमान रखेगा और अल्लाह के आगे अमल से झुकता रहेगा अल्लाह उसे बुकन्द मुकाम अता करेगा। अल्लाह का हुक्म है तकबा हासिल करो, मुत्तक़ी बनो और सच्चों के साथ हो जाओ। इमाम फरमाते हैं जो इंसान ख़ुम्स निकालता है वह कभी गरीब नही हो सकता। उन्होंने कहा की रसूल अपनी बेटी फ़ातिमा ज़हरा से बेपनाह मोहब्बत करते थे और जब वह आतीं थीं तो उनके सम्मान में खड़े हो जाते थे। रसूल के बाद जालिमों ने रसूल की उसी बेटी के घर आग लगाकर जुल्म ढाए। और जब शहजादी अपना हक लेने जालिम बादशाह के दरबार मे गईं तो उनको हक भी नहीं दिया गया। मजलिस में सलीम रज़ा, तसलीम रज़ा, सफीर हैदर ने सोजख्वानी और मौलाना अनवारुल हसन जैदी, ख़ुर्शीद हैदर, अख्तर अब्बास रिज़वी, तनवीर हसन, ताबिश रिज़वी, सलमान रिज़वी, आबिद रज़ा ने पेशख्वानी की। मजलिस में अल्हाज कमर अब्बास नकवी करबलाई, सैयद मोहम्मद हादी, जानू, हसन अब्बास, मो. अब्बास, मो. मियां, शावेज़ नक़वी, जहीर अब्बास, तहसीन रज़ा, अदनान जाफरी, सैफू, राहिल, जीशान हैदर सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।
Author: Mohammed irfan













