इटावा, 08 अगस्त 2026 — माँ की आँखों से बेटी के लिए गिरे आँसू और थाने की चौखट पर गुहार – यह कहानी उसी पीड़ा से शुरू होती है, लेकिन “ऑपरेशन मुस्कान” के जरिए इटावा पुलिस ने उसे सुखद अंत तक पहुँचाया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में चलाए जा रहे इस अभियान के तहत थाना जसवंतनगर पुलिस ने एक गुमशुदा नाबालिग बालिका को न सिर्फ सकुशल बरामद किया, बल्कि उसे उसके परिजनों की बाहों में सौंपकर एक परिवार की मुस्कान लौटा दी।
07 अगस्त 2026 स्थान : थाना जसवंतनगर, जनपद इटावा 12 वर्षीय नाबालिग बालिका
शिकायत : माँ ने थाने पहुँचकर बताया कि उनकी बेटी घर में किसी बात से नाराज होकर बिना बताए कहीं चली गई है – काफी खोजबीन के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला।
सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष कमल भाटी ने तुरंत संज्ञान लिया और बालिका की सुरक्षित बरामदगी के लिए इलेक्ट्रॉनिक व भौतिक साक्ष्यों (सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, आसपास के संपर्कों) के आधार पर समानांतर जाँच शुरू कर दी। पुलिस टीम ने रात-दिन एक करके कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी और तकनीकी सहायता से बालिका के मूवमेंट का पता लगाया।
अथक प्रयासों के बाद अगले ही दिन बालिका को सकुशल बरामद कर लिया गया। उसकी मानसिक स्थिति को देखते हुए पुलिस ने महिला कांस्टेबल शिवानी को उसके साथ रखा, जिससे बच्ची को सहज महसूस हो सके।
सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएँ (जैसे—मेडिकल जाँच, कोर्ट में सूचना, बाल कल्याण समिति को अवगत कराना) पूर्ण करने के बाद बालिका को उसके माता-पिता के सुपुर्द किया गया। थाना परिसर में जैसे ही माँ-बेटी एक-दूसरे की बाहों में आईं, वहाँ मौजूद सभी पुलिसकर्मियों की आँखें भीग आईं।
परिजनों ने माना – “पुलिस ही हमारी सबसे बड़ी उम्मीद है”
बालिका को सकुशल पाकर परिजन भावुक हो गए। उन्होंने एसएसपी इटावा और पूरी पुलिस टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा :
“अगर पुलिस इतनी तेजी से न आती, तो शायद हम अपनी बिटिया को खो देते। पूरी टीम ने माँ की तरह संवेदना दिखाई।”
उन्होंने हर पुलिसकर्मी की भूरि-भूरि प्रशंसा की और इसे “सच्ची पुलिसिंग” की मिसाल बताया।
सराहनीय पुलिस टीम
थानाध्यक्ष – कमल भाटी (जसवंतनगर) उपनिरीक्षक हेमन्त कुमार,कांस्टेबल प्रदीप कुमार,महिला कांस्टेबल शिवानी (जिन्होंने बच्ची को मानसिक सहारा दिया)
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा :
“ऑपरेशन मुस्कान हमारी उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसमें हर गुमशुदा बच्चा हमारा अपना है। हम तकनीक और मानवीय संवेदना के सम्मिलित प्रयास से मिशन को सफल बना रहे हैं।”
उन्होंने जनता से अपील की कि यदि कहीं कोई बच्चा गुम हो तो तुरंत पुलिस को सूचित करें – समय रहते कार्रवाई ही जीवन बचाती है।
आज जसवंतनगर का वह घर, जो कल तक उदासी में डूबा था, फिर से हँसी-खुशी से गूँज उठा। बालिका ने पुलिस अधिकारियों से कहा— “मैं फिर कभी घर से नहीं भागूँगी, मुझे एहसास हो गया कि मेरे माता-पिता ही मेरी असली दुनिया हैं।”
यह ऑपरेशन मुस्कान की सबसे बड़ी कामयाबी है – सिर्फ बच्ची बरामद करना नहीं, बल्कि उसका विश्वास और परिवार का सुख भी वापस लाना।
Author: Mohammed irfan












