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April 29, 2026 1:24 pm

मैदान और जिम्मेदारी का बेमिसाल समन्वय: सरकारी कर्तव्य के साथ क्रिकेट की पिच पर वीरेंद्र सिंह ‘वीरू’ का शानदार सफर

इटावा​ सरकारी पदस्थ अधिकारी की गंभीर जिम्मेदारियों को निभाते हुए खेल के प्रति अटूट समर्पण की मिसाल पेश कर रहे हैं वीरेंद्र सिंह ‘वीरू’। एक कुशल मीडियम पेसर गेंदबाज के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले वीरेंद्र सिंह का क्रिकेट के प्रति जुनून बचपन से ही इस कदर था कि पिता के प्रतिष्ठित प्रधानाचार्य होने के बावजूद वीरू अक्सर नजरें बचाकर मैदान की ओर रुख कर लिया करते थे। आज वही जुनून न केवल उनके व्यक्तित्व का हिस्सा है, बल्कि वे अपनी सरकारी व्यस्तताओं के बीच नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका भी बखूबी निभा रहे हैं।

​वीरेंद्र सिंह का मानना है कि खेल को सदैव खेल भावना के साथ ही खेलना चाहिए, जहाँ हीन भावना के लिए कोई स्थान न हो और सीनियर-जूनियर के बीच परस्पर सम्मान का अटूट रिश्ता बना रहे। उनकी खेल के प्रति इसी नेक सोच का परिणाम

इटावा महोत्सव की प्रदर्शनी में आयोजित होने वाले क्रिकेट टूर्नामेंटों में साफ दिखाई देता है। विगत कई वर्षों से संयोजक के रूप में वे न केवल टूर्नामेंट को नई दिशा दे रहे हैं, बल्कि सरकारी अनुदान की सीमाओं से आगे बढ़कर अपनी टीम के सहयोग से खिलाड़ियों को अधिक प्रोत्साहन राशि और सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं ताकि उभरती हुई प्रतिभाओं का मनोबल कभी कम न हो।

​उनके खेल जीवन की उपलब्धियां भी बेहद गौरवशाली रही हैं, जिसमें उन्होंने पांच वर्षों तक उत्तर प्रदेश सिविल सर्विस का प्रतिनिधित्व करते हुए राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी गेंदबाजी का लोहा मनवाया। इटावा आगमन के पश्चात अपने गुरु समान भाई अनिल चौधरी के सानिध्य में उनके भीतर क्रिकेट का जज्बा और अधिक प्रज्वलित हुआ। आज वीरेंद्र सिंह अपनी प्रशासनिक मर्यादाओं का पालन करते हुए खेल के मैदान पर भविष्य के सितारों को जागरूक और प्रेरित कर रहे हैं, जो यह साबित करता है कि यदि मन में सच्चा अनुराग हो तो कार्य और शौक के बीच एक आदर्श संतुलन बिठाया जा सकता है।

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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