इटावा की सड़कों पर सोमवार की देर रात एक अलौकिक दृश्य देखने को मिला, जब ‘एक कदम संस्कृति की ओर’ के संकल्प के साथ भगवान कालभैरव की पंचम भव्य पालकी यात्रा धूमधाम से निकाली गई। सुमेर सिंह किला स्थित हनुमान गढ़ी की प्राचीन महाविद्या काली गुफा से शुरू हुई इस यात्रा में आस्था और उत्साह का अनूठा संगम नजर आया। बैंड-बाजों की गूँज और भक्ति गीतों की धुन पर थिरकते युवाओं के जोश ने पूरी फिजा को शिवमय कर दिया। सनातन धर्म की प्राचीन परंपराओं को जीवंत करती यह यात्रा जब शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरी, तो श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर पालकी का भव्य स्वागत किया।
हनुमान गढ़ी के महंत वीराचारी साधक भैरवानंद गिरी सागर महाराज ने इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जिस प्रकार उज्जैन और काशी में भगवान कालभैरव अपने भक्तों का हाल जानने के लिए भ्रमण पर निकलते हैं, उसी परंपरा का निर्वहन करते हुए इटावा में भी इस यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा से पूर्व दोपहर में ब्रह्मलीन स्वामी आनंदेश्वर गिरी लाल बाबा की पुण्यतिथि के अवसर पर विशेष पूजन और विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। काली गुफा में माता महाकाली और भगवान कालभैरव का विशेष श्रृंगार किया गया, जो भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहा।
यात्रा का समापन देर रात मोक्षधाम पर हुआ, जहाँ आयोजित विशेष हवन-पूजन ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इस अवसर पर भक्तों द्वारा किए गए दीपदान से पूरा मोक्षधाम परिसर जगमगा उठा, जो अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक बना। इस पावन आयोजन में विभिन्न अखाड़ों के पूज्य संत, स्थानीय गणमान्य नागरिक और दूर-दराज से आए श्रद्धालु बड़ी संख्या में मौजूद रहे। भक्ति और संस्कृति का यह संगम न केवल धार्मिक आस्था का प्रदर्शन था, बल्कि शहर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का एक प्रभावी प्रयास भी साबित हुआ।











