इटावा जिला अस्पताल की बदहाली और प्रशासनिक अनदेखी की कलई उस वक्त खुल गई जब पीसीसी सदस्य प्रशांत तिवारी और कांग्रेस प्रवक्ता वाचस्पति द्विवेदी ने संयुक्त रूप से अस्पताल का स्थलीय निरीक्षण किया। अस्पताल परिसर के भीतर कदम रखते ही अव्यवस्थाओं की जो तस्वीर सामने आई, वह बेहद विचलित करने वाली है। रैन बसेरा, जो तीमारदारों के विश्राम के लिए बनाया गया था, आज खुद बदहाली के आंसू रो रहा है। महिला रैन बसेरा की छत से पानी का रिसाव इस कदर है कि पंखों के जरिए पानी सीधे बिस्तरों पर गिर रहा है और जर्जर छत का प्लास्टर आए दिन गिरता रहता है। हैरानी की बात यह है कि दिव्यांगों के लिए बने विशेष शौचालयों पर सालों से ताले लटके हैं और दीवार पर लिखा है कि चाबी के लिए इमरजेंसी वार्ड में संपर्क करें। एक दिव्यांग व्यक्ति के लिए यह व्यवस्था किसी क्रूर मजाक से कम नहीं है कि वह अपनी बुनियादी जरूरत के लिए पहले अस्पताल के चक्कर काटकर चाबी ढूंढे।
अस्पताल की इस बदहाली की फेहरिस्त यहीं खत्म नहीं होती। परिसर में लगा आरओ प्लांट सफेद हाथी साबित हो रहा है और मरीजों के पास शुद्ध पेयजल का कोई साधन उपलब्ध नहीं है। पार्किंग की अव्यवस्था ऐसी है कि रैन बसेरा के सामने ही दुपहिया वाहनों का अंबार लगा है, जिससे आने-जाने का रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध रहता है। पुरुष रैन बसेरा के गेट को भी तारों से बांधकर बंद कर दिया गया है। जब इन गंभीर समस्याओं को लेकर अस्पताल के उच्च अधिकारियों से जवाब मांगा गया, तो गैर-जिम्मेदाराना रवैये की पराकाष्ठा देखने को मिली। पुरुष विभाग के सीएमएस ने पूरी जिम्मेदारी महिला विभाग पर डाल दी, जबकि महिला विभाग की सीएमएस ने गेंद वापस पुरुष सीएमएस के पाले में फेंक दी। धन के अभाव और शासन-प्रशासन को पत्र लिखने का बहाना बनाकर अधिकारी अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ते नजर आए।
इस पूरे घटनाक्रम पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता वाचस्पति द्विवेदी ने बताया कि अस्पताल के भीतर की स्थिति नारकीय हो चुकी है। महिला तीमारदार फर्श पर सोने को मजबूर हैं और उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हैं। सरकारी डॉक्टर अपनी ड्यूटी से नदारद रहकर निजी क्लीनिकों में व्यस्त हैं और गरीब मरीजों को बाहर की महंगी दवाएं लिखने का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। अस्पताल में न तो जांचें सही समय पर हो रही हैं और न ही मरीजों की सुध लेने वाला कोई है। कांग्रेस नेताओं ने जिलाधिकारी से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और गैर-जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है, ताकि आम जनता को स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर हो रही इस प्रताड़ना से मुक्ति मिल सके।











