इटावा जैसे-जैसे सूरज की तपिश बढ़ रही है, इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षियों के लिए भी पानी का संकट गहराने लगा है। इस प्राकृतिक चुनौती को समझते हुए श्यामल सेवा समिति ने एक सराहनीय मानवीय पहल शुरू की है। समिति के सदस्यों ने कचोरा घाट स्थित प्रसिद्ध साइन मंदिर सहित क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों पर पक्षियों और जानवरों के लिए मिट्टी के पात्र (सकोरे) लगाए हैं।

इस सेवा कार्य का उद्देश्य केवल प्यास बुझाना ही नहीं, बल्कि समाज को जीव दया के प्रति जागरूक करना भी है। समिति के सदस्यों का मानना है कि कंक्रीट के जंगलों में तब्दील होते शहरों में अब पक्षियों के लिए प्राकृतिक जल स्रोत खत्म होते जा रहे हैं, ऐसे में हमारी थोड़ी सी जागरूकता उनकी जान बचा सकती है। अभियान के दौरान मंदिर परिसरों में ऐसे स्थानों का चयन किया गया जहाँ पक्षी आसानी से और सुरक्षित रूप से पानी पी सकें।
इस पुनीत कार्य के दौरान श्यामल सेवा समिति की कर्मठ सदस्य नेहा, प्रीति, स्नेहा पांडे, पदमा त्रिपाठी और माला दुबे सहित अन्य गणमान्य सदस्य प्रमुख रूप से मौजूद रहे। समिति ने स्थानीय लोगों से भी अपील की है कि वे अपने घरों की छतों और आंगन में पानी भरकर रखें ताकि इस भीषण गर्मी में कोई भी पंक्षी प्यास से न दम तोड़े।











