छिबरामऊ:क्षेत्र में आए भीषण आंधी-तूफान और ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचाई है। तेज हवाओं के साथ हुई मूसलाधार बारिश के कारण न केवल किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं, बल्कि कई गरीब परिवारों के आशियाने और रोजगार के साधन भी छिन गए हैं।
*दुकान का टीनशेड उड़ा, रोजगार का संकट*
खड़ा हुआ सबसे हृदयविदारक घटना काशीराम कॉलोनी के सामने स्थित ‘इकराम टी स्टाल’ पर घटी। यहां आंधी की तीव्रता इतनी अधिक थी कि दुकान का भारी-भरकम टीनशेड (टट्टर) उड़कर दूर जा गिरा। टट्टर गिरने से दुकान में रखा परचून का सारा सामान और चाय बनाने के उपकरण पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
दुकान के मालिक इकराम अंसारी ने रुंधे गले से बताया यही दुकान मेरे और मेरे परिवार के भरण-पोषण का एकमात्र जरिया थी। तूफान ने सबकुछ तबाह कर दिया है। अब हमारे सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है, हम कहाँ जाएंगे और क्या करेंगे, कुछ समझ नहीं आ रहा।
पेड़ गिरने से मार्ग बाधित, कई परिवार हुए बेघर तूफान की वजह से क्षेत्र में जगह-जगह पेड़ उखड़ गए, जिससे सड़कों पर आवागमन पूरी तरह ठप रहा। काशीराम कॉलोनी के आसपास भी कई पेड़ गिरने की खबरें हैं। तूफान की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई घरों की छतें उड़ गईं, जिसके कारण कई परिवार अब खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
किसानों की मेहनत पर फिरा पानी एक ओर जहां शहरों में नुकसान हुआ, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की कमर टूट गई है। तैयार खड़ी गेहूं की फसलें खेतों में बिछ गई हैं।
किसान बृजेंद्र सिंह के अनुसार, कच्ची गेहूं की फसलें (जिनमें अभी दाना पड़ रहा था) पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं, किसान बलराम सिंह ने बताया कि आलू वाले खेतों में बोई गई गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है क्योंकि उनकी स्थिति पहले से ही नाजुक थी।
मुआवजे की मांग स्थानीय नागरिकों और व्यापार मंडल ने प्रशासन से अपील की है कि इकराम अंसारी जैसे छोटे दुकानदारों और प्रभावित किसानों का सर्वे कराकर उन्हें तुरंत आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।











