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November 4, 2026 4:38 am

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जसवंतनगर पुलिस ने शांति भंग के आरोप में 16 लोगों को किया गिरफ्तार, न्यायालय में किया पेश इटावा। थाना जसवंतनगर पुलिस ने क्षेत्र में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई करते हुए अलग-अलग गांवों और क्षेत्रों के 16 लोगों को शांति भंग की आशंका में गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, 2 नवंबर 2026 को गिरफ्तार किए गए लोगों में ग्राम जलपोखर के जयवीर सिंह, अवनीश कुमार, विपिन कुमार और सत्यवीर सिंह शामिल हैं। इसके अलावा पीपरीपुरा निवासी कौशल कुमार, गोबेपुरा निवासी अजीत, डूडहा निवासी अमित, नगला विधि निलोई निवासी विनोद यादव और ओमवीर यादव तथा नगला नरिया निवासी प्रदीप कुमार उर्फ सिंधी को गिरफ्तार किया गया। वहीं, आगरा जनपद के जैतपुरा क्षेत्र के खटिकान मोहल्ला निवासी राजाराम, सूरज, बबलू, मनी और बारिश तथा बाह थाना क्षेत्र के बिजौली निवासी रामराज को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सभी 16 लोगों के खिलाफ धारा 170/126/135 बीएनएसएस के तहत निरोधात्मक कार्रवाई करते हुए उपजिला मजिस्ट्रेट न्यायालय जसवंतनगर में पेशी के लिए रवाना किया गया। थाना प्रभारी कमल भाटी ने बताया कि क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार से शांति भंग होने की आशंका पर पुलिस द्वारा सतर्कता बरतते हुए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस लगातार निगरानी कर रही है।

संस्कार विहीन उच्च शिक्षा अधूरी, सत्संग से ही संभव है ईश्वर की प्राप्ति: आचार्य सिंधु कुमार

अब्दुल्ला अख़्तर

बाबा वीरेश्वर महाराज मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन

छिबरामऊ (कन्नौज): ग्राम नगला दुर्गा स्थित बाबा वीरेश्वर महाराज मठिया वाले मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं को भक्ति का अमृत पान कराया गया। कथा के दौरान आचार्य सिंधु कुमार दुबे ने संस्कारों और सत्संग के महत्व पर विशेष जोर दिया।

मुख्य उपदेश: शिक्षा और संस्कार का संगम

आचार्य ने कहा कि आज के युग में केवल उच्च शिक्षा पर्याप्त नहीं है। यदि बच्चों को उच्च शिक्षा के साथ संस्कार नहीं दिए गए, तो सेवा और नैतिकता का लाभ समाज को नहीं मिल पाएगा। उन्होंने जीवन के कुछ कड़वे सत्यों और आध्यात्मिक सूत्रों पर प्रकाश डाला:

• सत्संग की महिमा: व्यक्ति की कामनाएं अनंत हैं, एक पूरी होती है तो दूसरी जन्म ले लेती है। केवल सत्संग ही वह मार्ग है जो ईश्वर प्राप्ति का रास्ता दिखाता है।

• संत का स्वभाव: संत का हृदय मक्खन के समान कोमल, शुद्ध और पवित्र होना चाहिए। क्षमाशीलता एक संत का सबसे बड़ा गुण है।

• कर्म की प्रधानता: वर्तमान समय कर्म प्रधान है। व्यक्ति जैसा बीज बोएगा, वैसा ही फल प्राप्त करेगा।

शिव महिमा और कलियुग में नाम संकीर्तन

कथा व्यास ने भगवान शिव के ‘नीलकंठ’ बनने की कथा सुनाते हुए बताया कि संसार की रक्षा के लिए विष पान करने वाले महादेव अति शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कलियुग में जहाँ दया और तप का अभाव है, वहाँ केवल प्रभु नाम का जाप और दान ही मानवता की रक्षा कर सकते हैं। यदि दान समाप्त हो गया, तो धरा का पतन निश्चित है।

पूजन एवं उपस्थिति

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य यजमान रामप्रकाश दुबे एवं शशी दुबे द्वारा व्यास गद्दी के पूजन के साथ हुआ। आरती के पश्चात सभी भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया।

प्रमुख उपस्थित जन:

इस अवसर पर जयप्रकाश दुबे, बंटी दुबे, वेदप्रकाश दुबे, कमलाकांत दुबे, घनश्याम दुबे, सत्यप्रकाश दुबे, राजेंद्र दुबे, बबलू दुबे, देवकीनंदन दुबे, प्रत्यूष द्विवेदी सहित भारी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं (आकांक्षा, मीनाक्षी, नीलम, मधु, पूनम आदि) उपस्थित रहीं।

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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