Explore

Search

April 14, 2026 8:45 pm

गुनाहों की माफी और रूह की पाकीजगी का सुनहरा अवसर है रमजान: हाफिज मोहम्मद अख़्तर

इबादत और मगफिरत का महीना, तरावीह से निखरती है रूह: मौलाना मुकीम

अब्दुल्लाह अख़्तर

छिबरामऊ : माह-ए-रमजान की आमद के साथ ही फिजाओं में बरकतों का नजूल शुरू हो गया है। इमाम मनिहारी मस्जिद (मरकज़) हाफिज मोहम्मद अख्तर और नायब इमाम मौलाना मुकीम ने रमजान-उल-मुबारक की अजमत और तरावीह की अहमियत पर रोशनी डालते हुए तमाम अवाम को इस मुबारक महीने की मुबारकबाद पेश की।
इमाम साहिबान ने जोर दिया कि यह महीना सिर्फ भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं, बल्कि अपने नफ्स (इच्छाओं) पर काबू पाने और अल्लाह की रजा हासिल करने का बेहतरीन जरिया है।
हाफिज मोहम्मद अख्तर ने रमजान की फजीलत बयान करते हुए कहा कि यह महीना सब्र, हमदर्दी और इबादत का है। इसकी मुख्य खूबियां ये हैं कि हदीस के मुताबिक, जो शख्स ईमान और सवाब की नीयत से रमजान के रोजे रखता है, उसके पिछले तमाम गुनाह माफ कर दिए जाते हैं, रमजान का हर लम्हा कीमती है, खासकर इफ्तार के वक्त की गई दुआएं अल्लाह कभी रद्द नहीं करता, इस महीने में जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं, जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं और शयातीन (शैतान) को कैद कर लिया जाता है,रमजान को तीन हिस्सों में बांटा गया है—पहला अशरा ‘रहमत’, दूसरा ‘मगफिरत’ (माफी) और तीसरा ‘जहन्नुम की आग से आजादी’ का है, इस महीने में नेक काम का सवाब 70 गुना बढ़ा दिया जाता है। इसलिए गरीबों और बेसहारा लोगों की मदद करना इस महीने की रूह है।
*नमाज-ए-तरावीह की अहमियत और बरकतें*
नायब इमाम मौलाना मुकीम ने तरावीह की सुन्नत पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि तरावीह न केवल शारीरिक इबादत है, बल्कि रूहानी सुकून का जरिया भी है अल्लाह के रसूल ने फरमाया कि जिसने रमजान की रातों में ईमान और सवाब की उम्मीद के साथ तरावीह की नमाज़ पढ़ी उसके पिछले गुनाह माफ कर दिए जाएंगे ,तरावीह में कुरान-ए-पाक सुनना और सुनाना सुन्नत-ए-मुअक्कदा है। यह दिल को मुनव्वर (रोशन) करता है, दिन में रोजा और रात में तरावीह की पाबंदी इंसान को गुनाहों से इस तरह पाक कर देती है जैसे वह आज ही पैदा हुआ हो, दिन भर के रोजे के बाद रात में लंबी इबादत इंसान में अनुशासन और सब्र पैदा करती है।
मौलाना मुकीम ने कहा कि इस पाक महीने में मस्जिदों को आबाद करें, पांच वक्त की नमाज की पाबंदी करें और अपने मुल्क में अमन-ओ-चैन के लिए खास दुआएं मांगें। उन्होंने नौजवानों से अपील की कि वे अपना वक्त सोशल मीडिया के बजाय तिलावत-ए-कुरान में गुजारें।
रमजान अल्लाह का मेहमान है, इसकी कद्र करें और इबादतों के जरिए अपने रब को राजी करें।

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

Live Tv
विज्ञापन
लाइव क्रिकेट स्कोर