हाफिज-ए-कुरान बने बिलाल, कारी शुएब बलरामपुरी की नात ने बांधा समां
रिपोर्ट अब्दुल्लाह अख्तर छिबरामऊ /कन्नौज।नगर के मोहल्ला कस्साबान स्थित मदरसा जामिया हुसैनिया (मस्जिद कस्साबान) में एक रूहानी और भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह मौका था मोहम्मद बिलाल के हाफिज़-ए-कुरान बनने पर उनकी दस्तार-ए-हिफ्ज़ (पगड़ी पोशी) का। इस दौरान जहाँ उलेमाओं ने इल्म की अहमियत पर रोशनी डाली, वहीं मुल्क में अमन-चैन और भाईचारे के लिए विशेष दुआएं मांगी गईं।
हर मुसलमान के लिए इल्म हासिल करना फर्ज -मुफ्ती रियाज
मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद मुफ्ती रियाज ने अपने संबोधन में शिक्षा की अनिवार्यता पर जोर दिया। उन्होंने कहा हर मुसलमान पर इल्म हासिल करना फर्ज है। कम से कम इतना इल्म तो हर किसी के पास होना चाहिए जिससे वह हलाल-हराम और जायज-नाजायज के बीच फर्क कर सके। यह गलतफहमी है कि इल्म हासिल करना सिर्फ आलिम या मौलवी का काम है। दीन को सीखने में कभी शर्म नहीं करनी चाहिए।
मुफ्ती रियाज ने भारत की साझा संस्कृति का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे मुल्क की असली खूबसूरती हिंदू-मुस्लिम एकता है। उन्होंने आपसी सौहार्द को बनाए रखने और वतन की तरक्की में योगदान देने की अपील की।
मशहूर कारी शुएब बलरामपुरी ने अपनी सुरीली और खूबसूरत आवाज में नातिया कलाम पेश कर समां बांध दिया। उन्होंने जब ये अशआर पढ़े, तो महफिल में मौजूद लोग झूम उठे:
“क्यों जँचे मेरी नज़रो में शामे कई, सकवते केसरी शौकत ए मंजरी…”
“अरशो कुर्सी से बाला है नाम आपका, आगे अल्लाह जाने मक़ाम आपका।”
मंच पर क्षेत्र के प्रमुख उलेमा मौजूद रहे, जिन्होंने हाफिज बिलाल को दुआओं से नवाजा। कार्यक्रम में मुख्य रूप से शामिल रहे मौलाना शमीम: सदर जमीयत उलेमा-ए-हिंद, कन्नौज (जिन्होंने दुआ कराई)
मौलाना रईस अहमद रहीमी,मुफ्ती ताहिर, हाफिज आज़म ,मौलाना सद्दाम,कारी तुफैल ,हाफिज मोहम्मद निहाल,हाफिज मोहम्मद अख्तर, हाफिज अब्दुल क़ादिर और हाफिज सुहैल।
कार्यक्रम के अंत में मौलाना शमीम (सदर जमीयत उलेमा-ए-हिंद, कन्नौज) ने सामूहिक दुआ कराई। इस भावुक दुआ में मुल्क में अमन, शांति, आपसी भाईचारे और खुशहाली की कामना की गई। मोहम्मद बिलाल को हाफिज़ बनने पर मुबारकबाद देने वालों का तांता लगा रहा। स्थानीय लोगों ने इसे क्षेत्र के लिए एक फख्र का पल बताया।











