प्रयागराज।त्रिवेणी के संगम तट पर विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन महाकुंभ शुरू है।महाकुंभ का यह अद्भुत संगम आध्यात्मिकता,रहस्यवाद और अद्वितीय संत परंपराओं का जीवंत प्रमाण है,जहां आस्था और चमत्कारों का अद्भुत मेल देखने को मिल रहा है।
महाकुम्भ में संगम में आस्था की डुबकी लगाने के लिए करोड़ों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।कुछ विरले ऐसे भी हैं जो अपने अशक्त माता-पिता को महाकुंभ में संगम में आस्था की डुबकी लगवाने के लिए लेकर चले आ रहे हैं।वृद्ध मां को पीठ पर लादे ऐसे ही एक श्रवण कुमार महाकुंभ में पहुंचे।
अमेठी जिले की गौरीगंज तहसील के कुशवैरा गांव के किसान महेश तिवारी की मां ने मकर संक्रांति पर संगम में आस्था की डुबकी लगाने की इच्छा जताई।यह इच्छा उनके दिल में लंबे समय से थी।हालांकि महाकुम्भ में श्रध्दालुओं के उमड़े सैलाब से महेश अपनी बुजुर्ग मां को सामान्य तरीके से संगम में आस्था की डुबकी लगवाने में असमर्थ हो रहे थे।फिर भी मां के सपने को पूरा करने का महेश का संकल्प अडिग था।
महेश तिवारी ने अपनी बुजुर्ग मां को रेलवे स्टेशन से अपने पीठ पर लादा और प्रयागराज स्टेशन से संगम तक पैदल यात्रा की।महेश की बुजुर्ग मां ने संगम में आस्था की डुबकी लगाईऔर वर्षों पुरानी इच्छा पूरी हुई।इसके बाद महेश ने मां को फिर से अपनी पीठ पर लादकर रेलवे स्टेशन पहुंचे।महेश तिवारी की पत्नी ममता ने भी उनका साथ दिया,जो इस परिवार के आपसी प्रेम और समर्पण की भावना को दर्शाता है। बेटे की सेवा भावना को देखकर हर श्रध्दालु अभिभूत रहा।
वरिष्ठ पत्रकार धनंजय सिंह ने कहा कि यह केवल एक बेटे का अपनी मां के प्रति प्रेम नहीं,ये उन सभी के लिए प्रेरणा है जो अपने माता-पिता को बोझ मानते हैं।आज के समय में महेश तिवारी का यह पुनीत कार्य यह संदेश देता है कि असली श्रद्धा और भक्ति अपने माता-पिता की सेवा में ही है।मेरी मां इस दुनिया में नहीं है हमको मां की कमी बहुत खलती है।











