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April 28, 2026 12:17 am

शिया वक्फ़ की इमामबारगाह में ताला, मजलिस रोकने की कोशिश, बाहर फर्श बिछाकर करनी पड़ रही मजलिस 

जनपद इटावा 26/04/2026 को इटावा वक्फ़ इमामबारगाह में बरसी की मजलिस को रोकने की साजिश के बीच नम ए आला का मंजर देखने को मिला। अज़मत अली इमामबारगाह को मुतवल्ली के रिश्तेदारों द्वारा प्राइवेट प्रॉपर्टी करार देकर ताला जड़ दिया गया, जिसके चलते मजलिस के लिए फर्श पर बैठना मजबूरी बन गया।

 

हर वर्ष की भाँति इस साल भी बरसी की मजलिस का आयोजन तय था। आयोजकों ने चार दिन पहले मौखिक सूचना दे दी थी और एक हफ्ते पहले पर्चे भी छपकर बाँट दिए गए थे। लेकिन इसके बावजूद ‘घटिया अज़मत अली इमामबारगाह’ का दरवाज़ा नहीं खोला गया। विपरीत परिस्थितियों में भी अकीदतमंदों ने हिम्मत नहीं हारी और इमामबारगाह के बाहर ही फर्श बिछाकर मजलिस का आयोजन करने लगे ।

 

मुतवल्ली 35 साल से कानपुर में, रिश्तेदारों ने बता दी ‘प्राइवेट प्रॉपर्टी’

 

इस वक्फ़ इमामबारगाह की मुतवल्ली शहाना बेगम पत्नी हसीन रज़ा पिछले 35 साल से कानपुर में रह रही हैं, लेकिन यहाँ उनके रिश्तेदार राहत हुसैन पुत्र मज़ाहिर हुसैन व अन्य रिश्तेदार जो उसी इमामबारगाह में रह रहे इस वक्फ़ संपत्ति को अपनी निजी जायदाद बताने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन्हीं रिश्तेदारों के दबाव में इमामबारगाह बंद रखी गई, ताकि मजलिस को नाकाम किया जा सके। पर जब स्थानीय लोगो ने आवाज़ उठायी आस पास के लोग आगये स्थति जब संवेदनशील बनी तो फिर आनन फानन में इमामबारगाह का गेट मजबूरन खोलना पड़ा, बाद में मजलिस इमामबारगाह में संपन्न हुई ।

 

अकीदतमंदों ने नहीं मानी हार, बाहर ही बिछा दिया फर्श

 

तालों के बावजूद मजलिस को बाहर फर्श बिठाकर करने लगे आयोजन ।श्रद्धालुओं ने कहा कि “ये जुल्म है कि वक्फ़ की संपत्ति पर कब्ज़ा जताने की कोशिश हो रही है, लेकिन हम अपनी मजलिस नहीं छोड़ेंगे।”

 

प्रशासन से माँग की गई है कि इस वक़्फ़ इमामबारगाह की मुतवल्ली के खिलाफ कार्रवाई की जाए, जिनके रिश्तेदार वक्फ़ कानून को ताक पर रखकर निजी संपत्ति का झूठा दावा कर रहे हैं।

 

आगे की कार्रवाई पर नज़र बनी हुई है।

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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