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October 30, 2026 8:18 pm

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जिलाधिकारी ने PET-2026 परीक्षा केंद्रों का किया औचक निरीक्षण, नकलविहीन एवं सकुशल परीक्षा के दिए सख्त निर्देश इटावा, 30 अक्टूबर 2026 — उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) द्वारा आयोजित प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET)-2026 के दृष्टिगत जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल ने जनपद के विभिन्न परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने राजकीय इंटर कॉलेज, इटावा तथा जन सहयोगी बालिका इंटर कॉलेज, बसरेहर एवं मनभावती कुंवरी जन सहयोगी इंटर कॉलेज, बसरेहर में पहुंचकर परीक्षा संचालन से संबंधित व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने अभ्यर्थियों के लिए की गई सुविधाओं का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों एवं केंद्र व्यवस्थापकों को निर्देश दिए कि परीक्षा को शांतिपूर्ण, पारदर्शी, निष्पक्ष एवं नकलविहीन ढंग से संपन्न कराया जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि परीक्षा के दौरान सभी निर्धारित दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए तथा अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न होने दी जाए। उन्होंने परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था, अनुशासन एवं निगरानी बनाए रखने के निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि परीक्षा की सुचिता बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि परीक्षा अवधि के दौरान पूरी सतर्कता बरती जाए तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना को रोकने के लिए आवश्यक कदम समय रहते उठाए जाएं। जिलाधिकारी ने कहा कि सभी अधिकारी एवं कर्मचारी अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी एवं तत्परता के साथ करें, ताकि PET-2026 की परीक्षा जनपद में शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।

निष्ठा और विवाद के बीच एआरटीओ प्रदीप कुमार: आरोपों के घेरे में कितनी सच्चाई

इटावा ​जहाँ एक ओर प्रशासनिक अधिकारी दिन-रात जनसेवा और विभागीय कार्यों में जुटे रहते हैं, वहीं हाल ही में एआरटीओ प्रदीप कुमार से जुड़ा एक संवेदनशील मामला सामने आया है। उन पर 5000 रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया है, जो चर्चा का विषय बना हुआ है।

​वायरल वीडियो और तथ्यों का अभाव

​सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसके आधार पर अधिकारी की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, गौर करने वाली बात यह है कि हमारा चैनल/अखबार इस वायरल वीडियो या रिश्वत के दावों की पुष्टि नहीं करता है। वीडियो के गहन अवलोकन से यह स्पष्ट होता है कि इसमें कहीं भी अधिकारी को पैसे लेते हुए नहीं दिखाया गया है। एक ईमानदार छवि वाले वरिष्ठ अधिकारी पर बिना ठोस सबूत के ऐसे गंभीर आरोप लगाना न केवल अनुचित है, बल्कि प्रशासनिक मनोबल को भी प्रभावित करता है।

​सिस्टम की चुनौती या सम्मान की कमी?

​यह सवाल खड़ा होता है कि क्या यह व्यवस्था की कमी है या फिर किसी के सम्मान को ठेस पहुँचाने की साजिश? एक अधिकारी अकेले पूरे सामाजिक और विभागीय ढांचे को संभालने का प्रयास करता है, जिसकी तस्वीरें उनके समर्पण को खुद बयां करती हैं। जिलाधिकारी के संज्ञान में भी ऐसे मामले आते रहते हैं, लेकिन बुनियादी सवाल यही है कि क्या केवल आरोप लगा देने से किसी समस्या का समाधान संभव है?

​”मेरा उद्देश्य केवल चालान काटना नहीं, बल्कि लोगों को नियमों के प्रति जागरूक करना है। जो गलत दिखता है, उसे सुधारने के लिए चालान एक माध्यम मात्र है ताकि सामने वाला अपनी जिम्मेदारी समझ सके।”

— प्रदीप कुमार, एआरटीओ

​कानूनी विकल्प और समझदारी का मार्ग

​सरकारी कार्य में बाधा डालना एक गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है। लेकिन एआरटीओ का मानना है कि दंडात्मक कार्रवाई से ज्यादा जरूरी जनता को सही जानकारी देना और नियमों को समझाना है। चालान काटने या आरोप-प्रत्यारोप के खेल से किसी भी जटिल समस्या का स्थाई हल नहीं निकल सकता। व्यवस्था में सुधार तभी संभव है जब जनता और प्रशासन के बीच आपसी समझ और सम्मान बना रहे।

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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