पीड़ित अल्पसंख्यक भारत में शरण लेते हैं- रिजीजू
किरेन रिजिजू ने कहा “एक नैरेटिव बनाया जा रहा है। यूरोपियन यूनियन में सेंटर फॉर पॉलिसी एनालिसिस के सर्वे के अनुसार यूरोपियन यूनियन में 48% लोग भेदभाव के शिकार हुए हैं। इनमें से ज़्यादातर मुसलमान हैं, इस्लाम को मानने वाले हैं। फ्रांस में भेदभाव की कई रिपोर्ट पेश की गईं। उसमें बहुसंख्यक मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सिर पर स्कार्फ़, बुर्का पहनने वालों पर आपत्ति जताई और कहा कि उनके साथ ये भेदभाव हो रहा है। स्पेन में मुसलमानों के खिलाफ़ आंतरिक घृणा अपराधों की रिपोर्ट इतनी ज़्यादा है, इसका भी रिपोर्ट में ज़िक्र किया गया है…आप पाकिस्तान की हालत जानते हैं, बांग्लादेश में क्या होता है, आप लोग जानते हैं कि अफ़गानिस्तान में सिखों, हिंदुओं, ईसाइयों के साथ क्या हुआ है, चाहे तिब्बत की समस्या हो या म्यांमार की, श्रीलंका की या बांग्लादेश की, पाकिस्तान की या अफ़गानिस्तान की, अगर अल्पसंख्यकों पर अत्याचार होता है या कोई समस्या आती है, तो सबसे पहला देश जहां वे सुरक्षा मांगने आते हैं, वो है भारत। फिर ऐसा क्यों कहा जाता है कि इस देश में अल्पसंख्यकों के लिए कोई सुरक्षा नहीं है…मैं यह कह रहा हूं कि ऐसी बातें नहीं कही जानी चाहिए जिससे देश की छवि को नुकसान पहुंचे, मैं यह किसी एक पार्टी के लिए नहीं कह रहा हूं। मैं यह देश के लिए कह रहा हूं।”









