इटावा जनपद की सड़कों पर जब यातायात नियमों की बात आती है, तो एक चेहरा प्रमुखता से उभर कर सामने आता है—यातायात प्रभारी सूबेदार सिंह। मूल रूप से जनपद एटा के निवासी सूबेदार सिंह आज अपनी विशिष्ट कार्यशैली के कारण इटावा में एक नई पहचान बना चुके हैं। उनके सेवा भाव और बेहतरीन कार्यकुशलता के लिए वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उन्हें कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है। बचपन से ही मेधावी रहे सूबेदार सिंह अपने माता-पिता के उन संस्कारों को अपनी ड्यूटी का आधार मानते हैं, जिनमें उन्हें सिखाया गया था कि यदि हम किसी को जीवन दे नहीं सकते, तो हमें किसी का जीवन लेने का भी अधिकार नहीं है।
आज के दौर में सड़क दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण लापरवाही है। सूबेदार सिंह का मानना है कि देश के होनहार नवयुवक अक्सर बिना हेलमेट और बिना सीट बेल्ट के वाहन चलाकर अपने जीवन को जोखिम में डालते हैं। वे इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं कि जब एक पिता अपने बच्चों को स्कूटी या बाइक पर बिना हेलमेट के बिठाकर चलता है, तो बच्चे वही गलत संस्कार सीखते हैं। भारत में पंजीकृत वाहनों में लगभग 79 प्रतिशत संख्या दोपहिया वाहनों की है और अधिकांश दुर्घटनाएं हेलमेट न पहनने या सिर में गंभीर चोट लगने के कारण होती हैं। अक्सर लोग सर दर्द या चश्मे जैसे बहाने बनाकर हेलमेट से बचने की कोशिश करते हैं, जो अंततः जानलेवा साबित होता है।
सूबेदार सिंह की कार्यप्रणाली सख्त भी है और मानवीय भी। जहाँ एक ओर वे पहली और दूसरी गलती पर लोगों को समझाकर सुधार का मौका देते हैं, वहीं तीसरी बार नियम तोड़ने पर गाड़ी सीज करने या भारी चालान काटने जैसी सख्त कार्रवाई से पीछे नहीं हटते। सिफारिशों के दौर में भी उनका स्पष्ट कहना है कि कानून सबके लिए बराबर है और जीवन से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विशेष रूप से बुलेट में पटाखे वाले साइलेंसर लगाने वालों के प्रति वे बेहद सख्त हैं; ऐसे वाहनों को सीधे सीज करने के निर्देश हैं।
इटावा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में टीएसआई सूबेदार सिंह आईटीएमएस (ITMS) प्रणाली का भी बखूबी उपयोग कर रहे हैं। उनका कहना है कि आप पुलिस की नजरों से एक बार बच सकते हैं, लेकिन सड़कों पर लगे कैमरों से नहीं बच पाएंगे। रील बनाने के चक्कर में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले युवक-युवतियों को भी वे चेतावनी देते हैं कि ऐसी गलतियां उनके भविष्य पर भारी पड़ सकती हैं और उन्हें जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। यातायात पुलिस उपनिरीक्षक , कई महिला,पुरुष पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर वे शहर के हर चौराहे और गली में मुस्तैद हैं ताकि जनता सुरक्षित रहे। शराब पीकर वाहन चलाने वालों को वे भावुक अपील करते हुए समझाते हैं कि घर पर कोई आपका इंतजार कर रहा है; पैसा वापस आ सकता है, लेकिन कीमती जीवन नहीं।









