अब्दुल्ला अख़्तर
प्रशासन की चुप्पी से बढ़े हौसले, 195 का पैक 275 रुपये में बेचने की खुली लूट
छिबरामऊ:नगर में इन दिनों गुटखा और पान मसाला के शौकीनों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। बाजार में पान मसाला अब निर्धारित प्रिंट रेट पर नहीं, बल्कि व्यापारियों की मनमर्जी के दामों पर बिक रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि इस “खुली लूट” की जानकारी होने के बावजूद जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी सोए हुए हैं।
स्थानीय उपभोक्ताओं का आरोप है कि बड़े व्यापारियों ने साठगांठ कर भारी मात्रा में स्टॉक जमा कर लिया है। बाजार में जानबूझकर ‘कृत्रिम कमी’ (Artificial Shortage) पैदा की गई है, ताकि माल को ऊंचे दामों पर खपाया जा सके जिस पैकेट पर अंकित मूल्य 195 रुपये है, उसे बेखौफ होकर 275 से 300 रुपये तक में बेचा जा रहा है, बाजार में जीएसटी (GST) बढ़ने और टैक्स वृद्धि की झूठी खबरें फैलाकर छोटे दुकानदारों और ग्राहकों को गुमराह किया जा रहा है, लोगों का कहना है अगर सरकार ने टैक्स नहीं बढ़ाया, तो दाम क्यों बढ़े? और अगर कोई नया आदेश है, तो वह सार्वजनिक क्यों नहीं है?
उपभोक्ता संरक्षण नियमों के अनुसार, एमआरपी (MRP) से अधिक वसूली करना एक दंडनीय अपराध है। लेकिन छिबरामऊ और आसपास के क्षेत्रों में यह ‘मुनाफाखोरी मॉडल’ फल-फूल रहा है। निरीक्षण के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति हो रही है, जिससे व्यापारियों के हौसले बुलंद हैं।
आम जनता अब जिला प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर देख रही है। क्या इस अवैध वसूली पर लगाम लगेगी या फिर विभागीय मिलीभगत के चलते आम आदमी की जेब इसी तरह कटती रहेगी? यदि जल्द ही सख्त छापेमारी और कार्रवाई नहीं हुई, तो यह कालाबाजारी एक स्थायी व्यवस्था का रूप ले लेगी।
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