अब्दुल्ला अख़्तर
न्यायिक कार्य का बहिष्कार कर तहसीलदार को सौंपा राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन, आंदोलन की दी चेतावनी
छिबरामऊ (कन्नौज)। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित अधिवक्ता संशोधन विधेयक के विरोध में मंगलवार को बार एसोसिएशन छिबरामऊ के बैनर तले अधिवक्ताओं ने मोर्चा खोल दिया। आक्रोशित वकीलों ने तहसील परिसर में जोरदार प्रदर्शन करते हुए न्यायिक कार्य का पूर्ण बहिष्कार किया और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
*विधेयक को बताया ‘काला कानून’*
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविन्द कुमार सिंह राठौर और महासचिव ललित प्रताप सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों अधिवक्ताओं ने जुलूस निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। वकीलों का कहना है कि यह विधेयक न केवल अधिवक्ता हितों के विपरीत है, बल्कि वकीलों की गरिमा और उनकी स्वायत्तता पर सीधा प्रहार है। प्रदर्शन के बाद अधिवक्ताओं ने तहसीलदार के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा।
महासचिव ललित प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि संशोधन के बहाने अधिवक्ताओं पर अनावश्यक अंकुश लगाने और लाइसेंस प्रक्रिया को जटिल बनाने की साजिश रची जा रही है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, अध्यक्ष ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अधिवक्ता न्याय प्रणाली का मजबूत स्तंभ हैं; यदि सरकार ने इस ‘काले कानून’ को वापस नहीं लिया, तो छिबरामऊ से लेकर दिल्ली तक बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान नवनिर्वाचित अध्यक्ष जीतू श्रीवास्तव, महासचिव पंकज मिश्रा, राजेश शाक्य, दुर्गा नरायन सिंह, राजीव हजेला, रामरक्षपाल यादव, कन्हई सिंह वर्मा, रामचन्द्र यादव, दिनेश चन्द्र यादव, रजनीश यादव, संजीव कुमार दुबे, बृजेन्द्र सिंह राजपूत, रामप्रकाश यादव, रूपेश दुबे, स्नेहलता गुप्ता, राधिका, अंजू पटेल, वेदमती, अमित राजपूत, नरेन्द्र शाक्य, अवनीश वर्मा, जयवीर सिंह, अभिरूप सिंह दीक्षित, संदीप चौहान और वेदराम समेत भारी संख्या में वरिष्ठ अधिवक्ता व कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित रहे।
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